दो मुद्दों पर बनी हुई है सबसे बड़ी पेच
JPSC-JSSC विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने या फिर पूरे मामले की निष्पक्ष CBI जांच कराने की है. छात्रों का कहना है कि इन दोनों मुद्दों पर सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है, जिसके चलते आंदोलन लगातार जारी है. इसके साथ ही अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, आयोग में सुधार और लंबे समय से लंबित मांगों को भी उठाते रहे हैं.
नई भर्तियों के जरिए निकल सकता है रास्ता
आंदोलन को खत्म करने के लिए छात्रों ने एक वैकल्पिक रास्ता भी सरकार के सामने रखा है. उनकी मांग है कि JSSC CGL के लिए करीब 2000 नये पदों पर भर्ती निकाली जाए, जबकि JPSC में लगभग 300 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए. छात्रों का मानना है कि अगर सरकार नई वैकेंसी का ऐलान करती है तो बड़ी संख्या में युवा आंदोलन से हटकर दोबारा अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान दे सकेंगे.
रोजगार के अवसर को लेकर युवाओं में नाराजगी
अभ्यर्थियों का कहना है कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन लंबे समय से अनियमित रहा है. J-TET जैसी परीक्षाओं में भी लंबे अंतराल का मुद्दा उठाया जाता रहा है. छात्रों के मुताबिक राज्य के विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, ऐसे में सरकार को नियमित रूप से नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए. उनका तर्क है कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो आंदोलन की स्थिति भी सामान्य हो सकती है.
विधानसभा घेराव के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
विधानसभा घेराव के दौरान हुए घटनाक्रम और लाठीचार्ज के बाद छात्र आंदोलन पहले ही राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. अब 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा ने सरकार और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है. आंदोलन से जुड़े आनंद मोहन का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ते हैं तो प्रशासन के सामने स्थिति संभालने की चुनौती होगी. ऐसे में 20 अगस्त से पहले बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश महत्वपूर्ण हो सकती है.
कांग्रेस के लिए भी आसान नहीं है स्थिति
छात्र आंदोलन का असर कांग्रेस की राजनीति पर भी पड़ रहा है. झारखंड में कांग्रेस सत्ता गठबंधन का हिस्सा है, जबकि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर सरकारों को घेरती रही है. आंदोलन के शुरुआती चरण में कांग्रेस नेताओं की सक्रियता और राहुल गांधी की छात्रों से फोन पर हुई बातचीत ने पार्टी के प्रति सकारात्मक संदेश दिया था. अब आंदोलन लंबा खिंचने के साथ कांग्रेस पर भी छात्रों के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाने का दबाव बढ़ रहा है.
राहुल गांधी के पत्र ने बढ़ाई चर्चाएं
इसी बीच राहुल गांधी की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है. हालांकि पत्र में क्या लिखा गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है. दूसरी ओर 18 अगस्त को कांग्रेस की अहम बैठक प्रस्तावित है. इसमें मंत्री, विधायक और प्रदेश संगठन के पदाधिकारी शामिल होंगे. माना जा रहा है कि बैठक में JPSC-JSSC विवाद और छात्र आंदोलन को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है.
नाराजगी के बावजूद सरकार से उम्मीद कायम
छात्रों के आंदोलन में सरकार के खिलाफ नाराजगी साफ दिखाई दे रही है, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर उनका भरोसा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका मकसद सरकार को अस्थिर करना या किसी राजनीतिक दल के खिलाफ अभियान चलाना नहीं है. वे परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और रोजगार के अवसर चाहते हैं. छात्रों का कहना है कि यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक पहल करती है, तो वे आंदोलन समाप्त कर अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वापस लौटने को तैयार हैं.


