JPSC-JSSC आंदोलन में बढ़ा सियासी ताप, छात्रों ने फूंके हेमंत-राहुल-तेजस्वी के पुतले; 20 अगस्त को घेराव की चेतावनी
Ranchi: जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ रांची में छात्रों का आंदोलन 22वें दिन भी जारी है. अब विरोध प्रदर्शन का तेवर और तीखा हो गया है. छात्रों ने अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव के सांकेतिक पुतले जलाकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जतायी.
इससे पहले आंदोलनकारी छात्र मौन मार्च, तिरंगा यात्रा और अन्य विरोध कार्यक्रमों के जरिए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर चुके हैं. अब छात्रों ने सरकार को 18 अगस्त तक का समय दिया है. उनका कहना है कि इस अवधि में यदि उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा.
CBI जांच और JSSC CGL रद्द करने पर अड़े छात्र
आंदोलनकारियों की सबसे प्रमुख मांग जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराने की है. छात्रों का आरोप है कि लंबे समय से आंदोलन के बावजूद उनकी मुख्य मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है.
दूसरी ओर, सरकार की ओर से छात्रों की कई मांगों को स्वीकार किए जाने की बात कही जा रही है. यही दावों और मांगों के बीच अंतर आंदोलन के जारी रहने की बड़ी वजह बन गया है.
18 अगस्त तक बातचीत का इंतजार
छात्रों ने फिलहाल सरकार के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखा है. उनका कहना है कि 18 अगस्त तक सरकार उनके साथ गंभीरता से वार्ता करे और मांगों पर ठोस निर्णय ले.
अगर तय समय तक समाधान नहीं निकलता है, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा. हालांकि, छात्रों ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार यदि बातचीत के जरिए समाधान निकालती है, तो आंदोलन को खत्म करने पर विचार किया जा सकता है.
पुतला दहन से बढ़ा राजनीतिक दबाव
हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के पुतले जलाने के पीछे छात्रों ने सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन पर दबाव बनाने का संदेश दिया है. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि गठबंधन के प्रमुख नेताओं को उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए सरकार के स्तर पर पहल करनी चाहिए.
खास तौर पर कांग्रेस से छात्रों की उम्मीद है कि वह सरकार के साथ बातचीत कर आंदोलन का समाधान निकालने की दिशा में भूमिका निभाये.
तिरंगा यात्रा के बाद अब आंदोलन का अगला चरण
पिछले दिनों छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा निकालकर भी विरोध दर्ज कराया था. आंदोलन के अलग-अलग कार्यक्रमों में छात्रों की भागीदारी देखने को मिल रही है. इससे साफ है कि परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलनकारियों का दबाव अभी कम नहीं हुआ है.
प्रशासन की भी आंदोलन पर नजर
लगातार चल रहे प्रदर्शन के बीच प्रशासनिक अधिकारी भी आंदोलन स्थल का जायजा लेते रहे हैं. एसडीएम, एडीएम और एएसपी स्तर के अधिकारियों के पहुंचने की बात सामने आयी है. प्रशासन की कोशिश है कि स्थिति नियंत्रण में रहे और बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाला जा सके.
समाधान के लिए श्वेत पत्र की मांग
आंदोलन को समाप्त कराने के लिए सरकार से अब तक उठाये गये कदमों को सार्वजनिक करने की मांग भी सामने आयी है. छात्रों की ओर से श्वेत पत्र जारी करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि उनकी मांगों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई.
इसके अलावा जेएसएससी सीजीएल की करीब 2000 सीटों पर नियुक्ति प्रक्रिया और जेपीएससी की कुछ सीटों के लिए उम्र सीमा में राहत देने जैसे सुझाव भी सामने आये हैं. छात्रों का कहना है कि इससे लंबे समय से परीक्षा और नियुक्ति की तैयारी कर रहे युवाओं को राहत मिल सकती है.
अब 18 अगस्त पर सबकी नजर
22 दिन से जारी आंदोलन के बीच छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. बारिश और तेज धूप के बीच प्रदर्शन के कारण कई छात्रों के बीमार पड़ने की बात सामने आयी है.
अब निगाहें 18 अगस्त पर टिकी हैं. यदि सरकार और छात्रों के बीच समयसीमा के भीतर सहमति बनती है, तो आंदोलन थम सकता है. वहीं बातचीत विफल रहने पर 20 अगस्त का मुख्यमंत्री आवास घेराव आंदोलन को एक नए चरण में पहुंचा सकता है.


