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AI रोबोट से EV कचरा गाड़ियों तक, ऐसे बदल रही है शहरों की सफाई व्यवस्था

भारत में स्वच्छता अभियान अब झाड़ू और कूड़ेदान तक सीमित नहीं रहा है। डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से शहरी स्वच्छता व्यवस्था तेजी से आधुनिक हो रही है। रायपुर में डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए सफाई सेवाओं की निगरानी हो रही है, वहीं तिरुवनंतपुरम में AI आधारित रोबोट दुर्गम नहरों की सफाई कर रहा है। दूसरी ओर गुंटूर, चेन्नई और इंदौर जैसे शहर कचरा संग्रहण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना रहे हैं।

रायपुर में ऑनलाइन हुई सेप्टिक टैंक सफाई की बुकिंग

रायपुर में नागरिकों को सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है। डिजिटल फेकल स्लज मैनेजमेंट (FSM) डैशबोर्ड के जरिए लोग ऑनलाइन डीस्लजिंग सेवा की बुकिंग, भुगतान और पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर सकते हैं।

मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी डालने पर सिस्टम पते की पहचान करता है और सिंगल-पेज फॉर्म के जरिए सेवा बुक की जा सकती है। आवेदन के बाद वाहन और सेवा की रियल-टाइम निगरानी की जाती है। काम पूरा होने के बाद ड्राइवर द्वारा तस्वीरें अपलोड कर डिजिटल सत्यापन भी किया जाता है।

इस व्यवस्था से नागरिक, सेवा प्रदाता और नगर निगम एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। साथ ही, यंत्रीकृत सफाई को बढ़ावा मिलने से सफाईकर्मियों को जोखिम भरे मैनुअल सीवर सफाई कार्यों से दूर रखने में मदद मिल सकती है।

तिरुवनंतपुरम में AI रोबोट कर रहा नहर की सफाई

तिरुवनंतपुरम की अमयिझांचन नहर का एक हिस्सा थंपानूर रेलवे परिसर के नीचे भूमिगत है। संकरे और जोखिम भरे इस हिस्से में इंसानों के लिए सफाई करना मुश्किल था। ऐसे में नगर निगम ने G-SPIDER नाम के AI-संचालित रोबोट का इस्तेमाल शुरू किया है।

इसे टेक्नोपार्क स्थित जेनरोबोटिक इनोवेशंस ने विकसित किया है। रोबोट मशीन विजन और सेंसर तकनीक की मदद से कचरे की पहचान करता है और उसे बाहर निकालता है। इसका बायोमिमेटिक क्लॉ अलग-अलग तरह के कचरे को उठाने में मदद करता है।

इस तकनीक का एक अहम पहलू सफाईकर्मियों की सुरक्षा है। जहरीली गैस, दूषित पानी और खतरनाक कचरे के सीधे संपर्क को कम करके ऐसे स्थानों पर सफाई का काम मशीनों के जरिए कराया जा सकता है।

कचरा संग्रहण में EV का बढ़ता इस्तेमाल

शहरी स्वच्छता में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। गुंटूर में 200 से अधिक इलेक्ट्रिक ऑटो घर-घर कचरा संग्रहण कर रहे हैं। GPS ट्रैकिंग से इन वाहनों की रियल-टाइम निगरानी की जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इससे सालाना 71 हजार लीटर से अधिक डीजल की बचत का अनुमान है।

चेन्नई में ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने 15 जोन में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए 5,478 बैटरी चालित ई-रिक्शा तैनात किए हैं। इन वाहनों में गीले, सूखे और खतरनाक कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे हैं, जिससे स्रोत पर ही कचरे के पृथक्करण को बढ़ावा मिलता है।

ये ई-रिक्शा हजारों गलियों और लाखों घरों तक पहुंच रहे हैं। वाहनों पर लगे ऑडियो सिस्टम के जरिए लोगों को कचरा अलग-अलग करने के बारे में जागरूक भी किया जाता है।

इंदौर में EV के साथ सोलर चार्जिंग

इंदौर ने इलेक्ट्रिक कचरा संग्रहण को नवीकरणीय ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। शहर में घर-घर कचरा संग्रहण के लिए इलेक्ट्रिक वाहन लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से GPS के जरिए की जाती है।

शहर में सोलर चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं। सौर ऊर्जा से इन वाहनों को चार्ज करने की व्यवस्था इलेक्ट्रिक कचरा संग्रहण को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मॉडल के तौर पर सामने आती है।

झाड़ू से स्मार्ट सिस्टम तक पहुंची स्वच्छता

इन पहलों से साफ है कि शहरी स्वच्छता व्यवस्था अब केवल सफाईकर्मियों और पारंपरिक वाहनों पर निर्भर नहीं रह रही है। डिजिटल डैशबोर्ड सेवाओं को ट्रैक करने में मदद कर रहे हैं, AI रोबोट जोखिम वाले इलाकों में सफाई कर रहे हैं और EV कचरा संग्रहण को कम-प्रदूषण वाले परिवहन से जोड़ रहे हैं।

आने वाले समय में इन तकनीकों का अधिक शहरों तक विस्तार शहरी स्वच्छता को स्मार्ट, सुरक्षित, कनेक्टेड और अधिक जवाबदेह बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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