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चांडिल डैम विस्थापितों की 44 साल बाद भी नहीं सुलझी समस्याएं, 7 अक्टूबर को धरना-प्रदर्शन का ऐलान

सरायकेला-खरसावां। चांडिल डैम विस्थापितों की वर्षों से लंबित पुनर्वास, मुआवजा और अन्य अधिकारों से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन की घोषणा की गई है। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन और विस्थापित मुक्ति वाहिनी ने संयुक्त रूप से 7 अक्टूबर 2026 को स्वर्णरेखा परियोजना अंचल एवं प्रमंडल कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। रविवार को चांडिल बांध नौका विहार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी गई।

संगठनों के प्रतिनिधि राकेश रंजन महतो, अंबिका यादव और जगन्नाथ किस्कू ने कहा कि चांडिल डैम परियोजना के लिए अपने पुश्तैनी गांव, जमीन, घर और आजीविका छोड़ने वाले विस्थापित परिवार 44 वर्षों बाद भी अपने अधिकारों और पुनर्वास लाभ के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

विस्थापित संगठनों का कहना है कि परियोजना के कारण कई गांव जलमग्न हुए और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि डूब क्षेत्र में चली गई। विस्थापन का असर लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा। इसके बावजूद कई परिवारों का भूमि मुआवजा अब तक लंबित है। इसके अलावा अन्य देय राशि और पुनर्वास से जुड़े लाभ भी कई परिवारों को नहीं मिल पाए हैं।

संगठनों ने दावा किया कि कई पात्र विस्थापित परिवारों को रोजगार या नौकरी का लाभ नहीं मिला है। कई परिवारों की विकास पुस्तिका नहीं बनी, जबकि विकास पुस्तिका बनने के बावजूद कुछ परिवार अनुदान के लाभ से वंचित हैं। प्रशिक्षण राशि और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने रखी गईं।

विस्थापित संगठनों ने परियोजना से जुड़ी शिकायतों और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावी जांच और कार्रवाई के अभाव में विस्थापितों की कई समस्याएं वर्षों से लंबित हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में चांडिल डैम के जल क्षेत्रों में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर प्लांट को लेकर भी चिंता जताई गई। संगठनों का कहना है कि कई विस्थापित परिवार जल क्षेत्र में मछली पालन के जरिए अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में फ्लोटिंग सोलर परियोजना से उनके पारंपरिक रोजगार और आय के स्रोत प्रभावित होने की आशंका है। संगठनों ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन विस्थापितों की आजीविका और अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इन्हीं मांगों को लेकर 7 अक्टूबर, बुधवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्वर्णरेखा परियोजना अंचल एवं प्रमंडल कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। दोनों संगठनों ने विस्थापित परिवारों, प्रभावित ग्रामीणों और समर्थकों से अधिक संख्या में धरना में शामिल होने की अपील की है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नारायण गोप, राकेश रंजन महतो, श्यामल मार्डी, अंबिका यादव, मनोहर महतो, देबेन महतो, हरेकृष्णा महतो, जगन्नाथ किस्कू, सूरज मुर्मू, बीरबल प्रमाणिक, कल्लू अंसारी, गोमा हांसदा, सुनीता हेम्ब्रम, सूरजमणि टुडू, पंचानन महतो, कार्तिक महतो, गौरी राजवार, भागीरथ लायक, सुनील टुडू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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