रांची:- 23 अगस्त 2026। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को छात्रों के मुद्दों की आड़ में राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश बंद करनी चाहिए।
विनोद पांडेय ने कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए युवाओं और छात्रों के सवालों का समाधान नहीं कर पाए, वे आज छात्रों के पीछे खड़े होकर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने छात्रों की सभी मांगों को मान लिया है और छात्र अपने घर लौट चुके हैं। 25 अगस्त को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में छात्र हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति इतनी कमजोर हो गई है कि उसे अपनी लड़ाई लड़ने के लिए छात्रों को आगे करना पड़ रहा है। छात्र-युवा अपने अधिकारों, पढ़ाई, रोजगार और भविष्य को लेकर संघर्ष करें, यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आंदोलनों का राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल उचित नहीं है।
झामुमो महासचिव ने बाबूलाल मरांडी से सवाल किया कि यदि उन्हें वास्तव में छात्रों की चिंता है तो वे छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर सकारात्मक संवाद क्यों नहीं करते? हर प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक दमन बताकर माहौल गरमाना और फिर थाने पहुंचकर राजनीतिक प्रदर्शन करना समस्या का समाधान नहीं है।
विनोद पांडेय ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और पुलिस को हर मामले में कानून के दायरे में कार्रवाई करनी चाहिए। बिना पूरी जानकारी के पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाना और हर कार्रवाई को राजनीतिक रंग देना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता लगातार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे छात्रों और युवाओं के बीच भ्रम और टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन कानून हाथ में लेने या राजनीतिक उकसावे की राजनीति को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता ने भाजपा की राजनीति को नकार दिया है। अब कभी छात्रों, कभी युवाओं और कभी कानून-व्यवस्था के मुद्दे के नाम पर भाजपा अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जनता सब देख रही है कि कौन छात्रों के भविष्य की चिंता कर रहा है और कौन उनके मुद्दों को राजनीति का ईंधन बना रहा है।
विनोद पांडेय ने कहा कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर झामुमो से राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। भाजपा नेताओं को यदि जनता के सवालों का सामना करना है तो उन्हें खुद मैदान में उतरना चाहिए।


