हर खदान की होगी सुरक्षा रैंकिंग, खतरे के हिसाब से तय होगी निगरानी
धनबाद। खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत देश की प्रत्येक खदान का सुरक्षा मूल्यांकन कर रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। खदानों को जोखिम, सुरक्षा नियमों के अनुपालन और प्रबंधन की स्थिति के आधार पर अंक और रेटिंग दी जाएगी।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खदानों में संभावित दुर्घटनाओं का पहले से पता लगाना और समय रहते सुरक्षा उपाय करना है। इसके लिए खदानों से जुड़ा सुरक्षा डेटा ऑनलाइन जुटाकर उसका विश्लेषण किया जाएगा।
सुरक्षा मानकों पर मिलेंगे अंक
प्रस्तावित सिस्टम में खदान की गहराई, भूगर्भीय स्थिति, छत और किनारों की मजबूती, मशीनों की स्थिति तथा सुरक्षा नियमों के पालन जैसे कई बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
जोखिम के आधार पर खदानों को तीन श्रेणियों में रखने का प्रस्ताव है। 70 से अधिक अंक वाली खदानें उच्च जोखिम, 30 से 70 अंक वाली मध्यम जोखिम और 30 से कम अंक वाली खदानें कम जोखिम की श्रेणी में आएंगी।
कमजोर रेटिंग वाली खदानों पर बढ़ेगी निगरानी
जिन खदानों की सुरक्षा रेटिंग खराब होगी, वहां निरीक्षण और निगरानी को और सख्त किया जा सकता है। इसके विपरीत बेहतर प्रदर्शन करने वाली खदानों में नियमित निरीक्षण की आवृत्ति कम करने का विकल्प रखा गया है।
अच्छी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने वाली खदानों को प्रोत्साहन और पुरस्कार देने का भी प्रस्ताव है। समग्र सुरक्षा रेटिंग को श्रम सुविधा पोर्टल से जोड़ने की योजना भी प्रस्तावित की गई है।
तीन अलग-अलग सूचकांकों से होगा आकलन
DGMS के मसौदे में राष्ट्रीय जोखिम रेटिंग सूचकांक, राष्ट्रीय अनुपालन रेटिंग सूचकांक और समग्र खान सुरक्षा रेटिंग शामिल हैं। इन मानकों के जरिए खदान की वास्तविक सुरक्षा स्थिति का आकलन किया जाएगा।
DGMS ने प्रस्ताव पर संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी हैं। सुझाव मिलने के बाद अंतिम व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।
AI से पहले पकड़ा जाएगा सुरक्षा जोखिम
नई प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिसिस का इस्तेमाल भी किया जाएगा। लगातार सामने आने वाले सुरक्षा उल्लंघन, हादसों के बढ़ते संकेत और सुरक्षा व्यवस्था में गिरावट जैसे पैटर्न को AI की मदद से पहले ही पहचाना जा सकेगा।
इससे संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में हादसा होने से पहले सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी और खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।


