JSSC भर्ती घोटाला: 2022 में सामने आ गई थी अरुण की भूमिका, चार साल बाद गिरफ्तारी ने उठाए कई सवाल
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की डिप्लोमा स्तर की भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले में अरुण कुमार की गिरफ्तारी के बाद वर्ष 2022 की CID जांच एक बार फिर चर्चा में आ गई है। जांच के दौरान ही एजेंसी के सामने अरुण की भूमिका, प्रश्नपत्र लीक करने की कथित साजिश और अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने वाले नेटवर्क से जुड़ी कई अहम जानकारियां आ चुकी थीं। इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी करीब चार साल बाद हुई।
पुरानी जांच के दस्तावेजों और पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक, अरुण कुमार पर परीक्षा से जुड़े काम का ठेका लेने के बाद कथित तौर पर कमाई के लिए भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी कराने का आरोप था। अब गिरफ्तारी के बाद उसके बयानों ने पुराने जांच बिंदुओं को फिर से सामने ला दिया है।
कम कीमत पर टेंडर लेना बना विवाद की वजह
जांच में अरुण कुमार का संबंध मेसर्स ICN इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और बिंसिस नामक कंपनियों से बताया गया था। इन कंपनियों को झारखंड की डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा से संबंधित काम मिला था।
जांच एजेंसी के अनुसार, टेंडर हासिल करने में खर्च होने के बाद रकम की भरपाई के लिए प्रश्नपत्र लीक कर अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने की कथित योजना बनाई गई। आरोप है कि इसी योजना के तहत परीक्षा में गड़बड़ी कराने की कोशिश हुई और बाद में संबंधित परीक्षा को स्थगित करना पड़ा।
अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद सामने आया अरुण का नाम
इस मामले में 22 सितंबर 2022 को पटना हाईकोर्ट के तत्कालीन सेक्शन अफसर अभिषेक कुमार की गिरफ्तारी हुई थी। पूछताछ के दौरान उसने अरुण कुमार के साथ अपने संबंधों और भर्ती परीक्षा से जुड़ी कथित साजिश के बारे में जानकारी दी थी।
अभिषेक के अनुसार, वर्ष 2019 में पटना हाईकोर्ट में काम करने के दौरान उसकी पहचान अरुण कुमार से हुई थी। बाद में दोनों की नजदीकियां बढ़ीं। वर्ष 2022 में अरुण ने कथित तौर पर उससे झारखंड की डिप्लोमा स्तर की भर्ती परीक्षा का टेंडर मिलने और प्रश्नपत्र लीक कर अभ्यर्थियों से रकम वसूलने की योजना की जानकारी साझा की थी।
इसके बाद अभिषेक भी कथित नेटवर्क का हिस्सा बन गया और उसने अपने स्तर पर लोगों को जोड़ना शुरू किया।
CDR से भी सामने आई थी नेटवर्क की गतिविधि
जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की भी पड़ताल की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, CDR से पता चला था कि 2 जुलाई 2022 को गिरोह से जुड़े कुछ लोग पटना के पुनपुन-परसाबाजार इलाके में सक्रिय थे और अगले दिन रांची पहुंचे थे।
इससे जांच एजेंसी को कथित नेटवर्क की गतिविधियों और आरोपियों के बीच संपर्क को समझने में मदद मिली थी। यानी अरुण की भूमिका से जुड़े कई सुराग जांच के शुरुआती दौर में ही एजेंसी के सामने आ गए थे।
परीक्षा से एक दिन पहले अभ्यर्थियों को बुलाने का आरोप
पूछताछ में अभिषेक ने कथित तौर पर बताया था कि करीब 100 अभ्यर्थियों को परीक्षा से एक दिन पहले पटना बुलाया गया था। आरोप है कि वहां उनके मोबाइल फोन और मूल प्रमाणपत्र अपने कब्जे में ले लिए गए थे।
इसके बाद अभ्यर्थियों को पुनपुन क्षेत्र के एक हॉल और पटना शहर स्थित एक मकान में रखा गया। जांच के मुताबिक, वहां उन्हें करीब 80 फीसदी प्रश्नों के उत्तर याद कराने की कोशिश की गई। बाद में गाड़ियों के जरिए अभ्यर्थियों को रांची और बोकारो के परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया गया।
चार साल बाद गिरफ्तारी से फिर उठे सवाल
अरुण कुमार की अब हुई गिरफ्तारी ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि जब वर्ष 2022 में ही जांच एजेंसी के पास उसकी भूमिका से संबंधित अहम जानकारियां और कथित नेटवर्क की गतिविधियों का विवरण मौजूद था, तो कार्रवाई में इतना लंबा वक्त क्यों लगा।
अब अरुण की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी पुराने दस्तावेजों, बयानों और डिजिटल साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा कर सकती है। इससे यह भी स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
फिलहाल, अरुण से पूछताछ के बाद मामले में आगे और क्या खुलासे होते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।


