रांची: झारखंड के किसानों, आदिवासी समूहों और स्थानीय उत्पादकों के लिए बड़ी खबर है। राज्य में तैयार होने वाले जैविक और प्राकृतिक उत्पादों को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने झारखंड के स्थानीय और प्राकृतिक उत्पादों को विदेशों में पहचान दिलाने के लिए नया प्लान तैयार किया है।
इस पहल का उद्देश्य झारखंड के पारंपरिक, प्राकृतिक और जैविक उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है, ताकि स्थानीय उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसर पैदा हों।
झारखंड में बड़ी मात्रा में महुआ, शहद, लाख, तसर, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, मोटे अनाज, वन उपज और अन्य प्राकृतिक उत्पाद तैयार होते हैं। इनमें से कई उत्पादों की देश के अलग-अलग हिस्सों में पहले से मांग है। अब इन्हें गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात के मानकों के अनुरूप तैयार कर विदेशी बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार
केंद्र की इस पहल से किसानों, स्वयं सहायता समूहों, महिला समूहों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। बेहतर पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार होने से झारखंड के स्थानीय उत्पादों की वैश्विक बाजार में पहचान मजबूत हो सकती है।
इसके साथ ही उत्पादकों को बाजार की मांग, गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और उत्पादकों को सीधे बड़े बाजार से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
रोजगार और आय बढ़ाने की उम्मीद
जैविक और प्राकृतिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से गांवों में प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन से जुड़े रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। खासकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार की इस पहल से अगर झारखंड के प्राकृतिक उत्पादों को वैश्विक बाजार में स्थायी जगह मिलती है, तो राज्य के किसानों और स्थानीय उत्पादकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ‘झारखंड के देसी उत्पादों’ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में यह अहम कदम साबित हो सकता है।


