रांची। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (BIT), मेसरा के वास्तुकला एवं योजना विभाग द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय ‘ग्रीन बिल्डिंग डिज़ाइन विथ एनर्जी सिमुलेशन फॉर ECSBC कंप्लायंस’ कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। 1 से 5 सितंबर 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रीन बिल्डिंग, ऊर्जा दक्षता, सतत वास्तुकला, ऊर्जा सिमुलेशन और ECSBC अनुपालन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला के पहले दिन कैट हॉल में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के पूर्व उपाध्यक्ष गजानंद राम, एनवायरमेंटल डिजाइन सॉल्यूशंस, नई दिल्ली के निदेशक वास्तुविद तन्मय तथागत और विभागाध्यक्ष डॉ. सत्याकी सरकार मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं संस्थान प्रार्थना के साथ हुई। आयोजन के संयोजक वास्तुविद आशुतोष कुमार और समन्वयक डॉ. राजन चंद्र सिन्हा भी उपस्थित रहे।
पहले दिन तन्मय तथागत ने ‘डीकार्बोनाइजेशन- नेट जीरो का रास्ता’ विषय पर व्याख्यान दिया। इसके बाद ग्रीन बिल्डिंग निर्माण सामग्री और उनके महत्व पर इंडस्ट्री सत्र आयोजित किया गया। मनसाराम आर्किटेक्ट्स, बेंगलुरु की संस्थापक एवं प्रधान वास्तुविद नीलम मंजूनाथ ने वास्तुकला में स्थिरता, सादगी और आध्यात्मिकता पर अपने विचार साझा किए। इसके बाद तन्मय तथागत, नीलम मंजूनाथ, वास्तुविद संदीप झा और डॉ. मंजरी चक्रवर्ती ने ‘ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्चुअलाइजेशन एंड सस्टेनेबल डिजाइन थिंकिंग’ पर डिजाइन स्टूडियो सत्र लिया।
कार्यशाला के दूसरे और तीसरे दिन ECSBC-C, ECSBC-R तथा इको निवास संहिता (ENS) से जुड़े प्रावधानों पर प्रशिक्षण दिया गया। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ पी.सी. थॉमस ने ऑनलाइन सत्र के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल भवन निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं राणा प्रताप पोद्दार के प्रतिनिधि तथा बीईई-प्रमाणित ECSBC मास्टर ट्रेनर और आर्किटेक्ट जितेंद्र कुमार व्यास ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
ऊर्जा दक्ष लैंडस्केप डिजाइन पर एनआईटी पटना की सहायक प्रोफेसर एवं लैंडस्केप आर्किटेक्ट डॉ. अनुष्री बर्मन ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने प्राकृतिक एवं निर्मित स्थलों के बेहतर समन्वय और ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखते हुए लैंडस्केप डिजाइन की अवधारणाओं पर चर्चा की।
कार्यशाला के चौथे दिन क्लाइमेट स्टूडियो सॉफ्टवेयर पर गहन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। वास्तुविद जयेश सिंह रावत और प्रतीक्षा परड ने प्रतिभागियों को सॉफ्टवेयर के माध्यम से पर्यावरणीय आंकड़ों का उपयोग करते हुए वास्तुशिल्प डिजाइन तैयार करने तथा भवन की ऊर्जा दक्षता का मूल्यांकन एवं अनुकूलन करने की जानकारी दी।
पाँचवें दिन कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सुशील कुमार सोलंकी के व्याख्यान से हुई। इसके बाद डॉ. मीनू अग्रवाल का ऑनलाइन सत्र आयोजित किया गया। सीएमपीडीआईएल, रांची के सेवानिवृत्त मुख्य वास्तुकार आर्किटेक्ट सुदीप्त चक्रवर्ती ने संस्थागत एवं औद्योगिक वास्तुशिल्प डिजाइन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। वहीं नलिन गोयल एंड एसोसिएट्स के प्रधान वास्तुकार और सीआईआई-आईजीबीसी मान्यता प्राप्त पेशेवर आर्किटेक्ट नलिन गोयल ने सस्टेनेबल आर्किटेक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा पर व्याख्यान दिया।
समापन सत्र में तन्मय तथागत और नीलम मंजूनाथ सहित अन्य विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव और विचार साझा किए। कार्यक्रम का अंतिम चरण साइट विजिट रहा, जिसमें प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में टिकाऊ वास्तुकला और ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिस को समझने का अवसर मिला।
पाँच दिवसीय कार्यशाला ने प्रतिभागियों को ऊर्जा दक्षता, सतत भवन डिजाइन, ग्रीन बिल्डिंग तकनीक और ऊर्जा सिमुलेशन को वास्तुशिल्प डिजाइन में प्रभावी रूप से शामिल करने के लिए व्यावहारिक एवं तकनीकी ज्ञान प्रदान किया।

