सरायकेला-खरसावां: किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से रांची के हेहल स्थित प्रसार प्रशिक्षण केंद्र में सरायकेला-खरसावां जिले के 50 चयनित किसानों के लिए समेकित कृषि प्रणाली पर पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरायकेला-खरसावां जिला परिषद की उपाध्यक्ष मधुश्री महतो शामिल हुईं। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल पारंपरिक खेती के सहारे किसानों की आमदनी बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में कृषि के साथ स्वरोजगार की गतिविधियों को जोड़ना जरूरी है।
मुर्गी, बकरी और गाय पालन के साथ मशरूम की खेती पर जोर
मधुश्री महतो ने किसानों को खेती के साथ मुर्गी पालन, बकरी पालन, बत्तख पालन, गाय पालन और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियां अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समेकित कृषि प्रणाली किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक तरीका है। इसके माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और खेती से होने वाली आमदनी के अतिरिक्त दूसरे स्रोत भी विकसित किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन, संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि एवं पशुपालन की विभिन्न गतिविधियों को जोड़कर काम करें। इससे खेती पर निर्भरता का जोखिम कम करने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
पांच दिवसीय प्रशिक्षण में सीखेंगे कृषि की नई तकनीकें
प्रसार प्रशिक्षण केंद्र, हेहल में आयोजित इस आवासीय कार्यक्रम में किसानों को समेकित कृषि प्रणाली से संबंधित जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रशिक्षण केंद्र के पदाधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और जिले के 50 प्रशिक्षु किसान उपस्थित रहे।
समेकित कृषि प्रणाली में फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को एक-दूसरे से जोड़कर संचालित किया जाता है। इसका उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना, लागत को नियंत्रित करना और किसानों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार करना है।
प्रशिक्षण के जरिए सरायकेला-खरसावां के किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

