रांची: झारखंड एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल (JEPC), धुर्वा स्थित परिसर में झारखंड महिला विकास समिति की ओर से ‘पीड़ित सुरक्षा योजना’ (Victim Protection Plan) को लेकर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मानव तस्करी के पीड़ितों के रेस्क्यू के बाद उनकी सुरक्षा, सहायता और पुनर्वास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में झारखंड महिला विकास समिति की प्रोजेक्ट डायरेक्टर किरण कुमारी पासी, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव वंदना सेजवालकर, CID के IG अजय लिंडा समेत विभिन्न संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव वंदना सेजवालकर ने कहा कि झारखंड को मानव तस्करी से मुक्त बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने पीड़ितों को रेस्क्यू किए जाने के बाद उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
वहीं, CID IG अजय लिंडा ने कहा कि पीड़ितों के लिए तैयार की जाने वाली सुरक्षा योजना उनकी भावनाओं और जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की स्थिति को समझते हुए उनके हित में संवेदनशील तरीके से काम करना जरूरी है।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं के महत्व पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, गांवों में रहने वाले स्थानीय प्रतिनिधियों को क्षेत्र की गतिविधियों की जानकारी होती है। ऐसे स्थानीय स्तर के नेटवर्क के माध्यम से मानव तस्करी से जुड़ी गतिविधियों के बारे में समय रहते सूचना एकत्र कर कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
कार्यशाला में मानव तस्करी के मामलों में पीड़ितों के रेस्क्यू के बाद उनकी सुरक्षा, संरक्षण, पुनर्वास और आगे की सहायता व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विभिन्न पक्षों के बीच विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पीड़ितों के लिए प्रभावी और संवेदनशील Victim Protection Plan तैयार करने की दिशा में समन्वय को मजबूत करना रहा।

