गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले के चर्चित बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र से 172 बटालियन CRPF को हटाकर अरुणाचल प्रदेश भेजे जाने के आदेश को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में चिंता और नाराजगी है। ग्रामीणों ने केंद्र सरकार से स्थानांतरण आदेश पर पुनर्विचार करने और 172 बटालियन की तैनाती गढ़वा में यथावत रखने की मांग की है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्रामीणों ने कहा कि बड़गड़ और भंडरिया क्षेत्र कभी माओवादियों के कोयल-शंख जोन का हिस्सा रहा है। बूढ़ा पहाड़ लंबे समय तक माओवादियों का प्रमुख ठिकाना माना जाता था। उस दौर में सुरक्षा बलों को लगातार मुठभेड़ों और बारूदी सुरंगों के खतरे का सामना करना पड़ता था। माओवादी विरोधी अभियानों में पुलिस और सुरक्षा बलों के कई जवानों ने अपनी जान गंवाई।
वक्ताओं के अनुसार, बूढ़ा पहाड़ को माओवादी प्रभाव से मुक्त कराने के अभियान में CRPF के साथ कोबरा बटालियन के जवानों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे समय तक चले अभियानों और जवानों की शहादत के बाद सितंबर 2022 में बूढ़ा पहाड़ को माओवादी प्रभाव से मुक्त कराने की घोषणा की गई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी से क्षेत्र में सुरक्षा का वातावरण मजबूत हुआ है। गढ़वा की भौगोलिक स्थिति और सीमावर्ती इलाकों को देखते हुए पर्याप्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी जरूरी है। ऐसे में 172 बटालियन को यहां से हटाने के फैसले को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों ने सांसद विष्णु दयाल राम और स्थानीय विधायक आलोक कुमार चौरसिया से मामले में पहल करने की मांग की है। सांसद को सौंपे गए ज्ञापन का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने 172 बटालियन को गढ़वा से हटाने के आदेश पर रोक लगाने अथवा पूरे मामले पर पुनर्विचार करने की मांग की। उनका कहना है कि जनसुरक्षा और क्षेत्र में स्थायी शांति के हित में बटालियन की तैनाती यथावत रखी जानी चाहिए।

