हजारीबाग :- ठाकुरबाड़ी मंदिर, बड़ा अखाड़ा में आयोजित ‘जनजातीय गौरव उत्सव’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि भारत की जनजातीय परंपरा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता की महत्वपूर्ण धरोहर है। जनजातीय समाज ने प्रकृति के साथ संतुलित जीवन, सामुदायिक सहयोग और अपनी परंपराओं के संरक्षण की मिसाल कायम की है।
राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय कला, हस्तशिल्प, हथकरघा और स्थानीय उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़कर न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सकता है, बल्कि आजीविका के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर डिजाइन, गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं।
उन्होंने महिला उद्यमिता पर जोर देते हुए कहा कि आज महिलाएं व्यापार, हस्तशिल्प, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। महिला का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना परिवार और समाज को भी मजबूत बनाता है। विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आई महिला उद्यमियों और शिल्पकारों की भागीदारी को उन्होंने अनुभव, कौशल और बाजार के अवसरों के आदान-प्रदान की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
राज्यपाल ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी पहल स्थानीय कारीगरों, छोटे उद्यमियों और महिला शक्ति को आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि देश का विकास तभी व्यापक और समावेशी होगा, जब गांवों, जनजातीय क्षेत्रों, छोटे उद्यमियों और महिलाओं की प्रतिभा को पर्याप्त अवसर मिलेंगे।
झारखंड की जनजातीय विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यहां कौशल और उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। पारंपरिक कलाओं और स्थानीय उत्पादों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराकर मजबूत आजीविका का माध्यम बनाया जा सकता है। युवाओं को पारंपरिक विरासत से जोड़ते हुए कौशल, नवाचार और उद्यमिता के अवसर देने से रोजगार बढ़ेंगे और पलायन कम करने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने महिला उद्यमियों और शिल्पकारों से अपने कौशल पर भरोसा रखने, गुणवत्ता को अपनी पहचान बनाने और बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप लगातार नवाचार करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा, “परंपरा हमारी शक्ति है और नवाचार हमारी आवश्यकता है।”
राज्यपाल ने विश्वास जताया कि ‘जनजातीय गौरव उत्सव’ जैसे आयोजन जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


