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राज्यपाल की मौजूदगी में जनजातीय गौरव उत्सव का भव्य समापन, महिला व जनजातीय उद्यमी सम्मानित

हजारीबाग:- ठाकुरबाड़ी मंदिर परिसर में 17 से 24 अगस्त तक आयोजित जनजातीय गौरव उत्सव का सोमवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में राज्यपाल की मौजूदगी रही। उन्होंने उत्सव में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों और प्रदर्शनी का भ्रमण कर जनजातीय, महिला एवं स्थानीय उद्यमियों के उत्पादों का अवलोकन किया और उद्यमियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।

समारोह की शुरुआत राज्यपाल के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान, अतिथियों का स्वागत-सम्मान और दीप प्रज्वलन किया गया। कार्यक्रम में जनजातीय कला, संस्कृति, परंपरा और उत्सव के दौरान आयोजित गतिविधियों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला एवं जनजातीय उद्यमियों के आठ समूहों को सम्मानित किया गया। पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

आयोजकों ने बताया कि यह उत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि झारखंड की जनजातीय विरासत, कला और महिला उद्यमिता को देश के विभिन्न राज्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच बना। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और झारखंड से पहुंचीं महिला उद्यमियों ने अपने उत्पाद, कला और हुनर का प्रदर्शन किया।

उत्सव के दौरान विभिन्न राज्यों की महिला उद्यमियों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और अपने हुनर को व्यवसाय से जोड़ने का अवसर मिला। वहीं, दूसरे राज्यों से आए प्रतिभागियों ने झारखंड की जनजातीय संस्कृति और विरासत को करीब से जाना। आयोजकों ने कहा कि इस पहल से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी मजबूती मिली।

समापन समारोह में आयोजन समिति के राष्ट्रीय अभियान प्रमुख राजमणि, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष राम किशोर सावंत, सेक्रेटरी सुमन देमता, मुख्य संरक्षक विनोद कुमार समेत पूरी आयोजन टीम के प्रयासों की सराहना की गई। महिला आयोजन समिति की पूनम मिश्रा, मरियम टुड्डू, मंजू मिश्रा, सीमा, डॉ. गौतम तथा हजारीबाग आर्ट एंड कल्चरल ट्रस्ट की सांस्कृतिक टीम के योगदान को भी रेखांकित किया गया।

आयोजन को सफल बनाने में मीडिया प्रभारी प्रदीप पाठक एवं मीडिया टीम, वॉलंटियर्स, प्रबंधन टीम तथा भोजन, आवास, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजकों ने कहा कि जनजातीय गौरव उत्सव का समापन यात्रा का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। झारखंड की जनजातीय कला, संस्कृति, विरासत और महिला उद्यमिता को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने का प्रयास आगे भी जारी रहेगा।

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