पटना: बिहार सरकार ने महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अगले कुछ वर्षों का बड़ा लक्ष्य तय किया है। सरकार की योजना के तहत वर्ष 2030 तक करीब 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही डेयरी सेक्टर को ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम बनाने की तैयारी है।
सरकार के प्लान के मुताबिक, डेयरी क्षेत्र से करीब 50 लाख महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, संग्रहण और डेयरी से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा देने पर फोकस किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
डेयरी सेक्टर बनेगा रोजगार का बड़ा माध्यम
बिहार में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन और कृषि पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार डेयरी सेक्टर के विस्तार के जरिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की योजना बना रही है। दूध उत्पादन से लेकर दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन तक की गतिविधियों में महिलाओं को जोड़ने पर जोर दिया जा सकता है।
इससे ग्रामीण महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर
सरकार का फोकस केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को स्वरोजगार, छोटे कारोबार और आय के स्थायी साधनों से जोड़ने पर भी है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें बाजार से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
2030 का लक्ष्य कितना होगा अहम?
2030 तक 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य बिहार के लिए बड़ा सामाजिक और आर्थिक लक्ष्य माना जा रहा है। यदि योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इसका असर महिलाओं की आय, ग्रामीण रोजगार और छोटे कारोबार पर देखने को मिल सकता है।
हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रोजगार के वास्तविक अवसर पैदा करने, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार उपलब्ध कराने और योजनाओं की प्रभावी निगरानी पर विशेष ध्यान देना होगा।


