रांची: झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और घर-घर तक नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने नल-जल मित्र कार्यक्रम को मंजूरी दी है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राज्य की लगभग 4,345 पंचायतों में 13 हजार से अधिक जलमित्रों के चयन की योजना बनाई गई है। इस संबंध में 29 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई एपेक्स कमेटी की बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।
हर पंचायत में तीन जलमित्रों के चयन की योजना
योजना के तहत प्रत्येक पंचायत में तीन-तीन नल-जल मित्रों का चयन किया जाएगा। इनका प्रमुख कार्य ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन के माध्यम से होने वाली पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सहयोग करना होगा। इससे गांवों में पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राज्य में पंचायतों की संख्या लगभग 4,345 बताई गई है। इसी आधार पर 13 हजार से अधिक जलमित्रों को इस कार्यक्रम से जोड़ने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था से जुड़ी छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान करने में भी मदद मिल सकती है।
जलमित्रों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
इस कार्यक्रम के तहत चयनित अभ्यर्थियों को उनकी जरूरत और पूर्व अनुभव के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, नए अभ्यर्थियों के लिए 510 घंटे का अल्पकालिक प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है। वहीं, पहले से अनुभव रखने वाले लोगों को 120 घंटे का कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, नियमित रखरखाव और छोटी-मोटी तकनीकी खराबियों को दूर करने से संबंधित कौशल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को लंबे समय तक बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।
युवाओं, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को अवसर
नल-जल मित्र कार्यक्रम के तहत स्थानीय ग्रामीण युवाओं, पूर्व सैनिकों, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को कौशल प्रशिक्षण देकर जलापूर्ति योजनाओं के संचालन से जोड़ने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी कौशल विकसित करने और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
योजना के क्रियान्वयन में पंचायती राज विभाग और श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग की भी भूमिका रहेगी। जिला स्तर पर उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
मानदेय और प्रशिक्षण के लिए वित्तीय व्यवस्था
रिपोर्ट के अनुसार, चयनित जलमित्रों के मानदेय और कौशल प्रशिक्षण के लिए 16वें वित्त आयोग के टाइड ग्रांट का उपयोग करने की योजना है। इसके अलावा, डिजिटल निगरानी और समन्वय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य तथा जिला स्तर पर कमांड एंड सपोर्ट सेंटर बनाए जाने और उन्हें झारखंड जल पोर्टल से जोड़ने का प्रस्ताव है।
क्षमता निर्माण के लिए बीआईटी मेसरा, आईएसएम धनबाद और निर्मला कॉलेज, रांची जैसे संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की योजना भी रिपोर्ट में बताई गई है।
चयन प्रक्रिया और आवेदन की तारीख पर नजर
जलमित्रों के चयन की मंजूरी से जुड़ी खबर सामने आई है, लेकिन आवेदन शुरू होने की तारीख, अंतिम तिथि, विस्तृत पात्रता, आयु सीमा और आवेदन पोर्टल की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इच्छुक अभ्यर्थियों को आधिकारिक विज्ञापन और संबंधित विभाग के दिशा-निर्देश जारी होने का इंतजार करना चाहिए।
निष्कर्ष: झारखंड में 13 हजार से अधिक जलमित्रों के चयन की प्रस्तावित योजना ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्थानीय स्तर पर तकनीकी रोजगार के अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। हालांकि, आवेदन और चयन से संबंधित अंतिम जानकारी आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

