रांची: राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर झारखंड की खेल प्रतिभाओं और खिलाड़ियों के संघर्ष की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। हॉकी, तीरंदाजी, फुटबॉल, एथलेटिक्स, क्रिकेट समेत कई खेलों में झारखंड के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि वर्षों तक मैदान में मेहनत करने वाले इन खिलाड़ियों को खेल से आर्थिक सुरक्षा कितनी मिल पाती है?
झारखंड में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए खेल नीति-2022 लागू है। इसके तहत खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को सम्मान राशि देने का प्रावधान है। 2026 में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक या भागीदारी करने वाले खिलाड़ियों से सम्मान राशि के लिए आवेदन लिए गए हैं। रांची जिला प्रशासन ने भी खिलाड़ियों की नकद पुरस्कार संबंधी सूची और आपत्ति प्रक्रिया जारी की थी।
मेडल जीतने पर मिलती है सम्मान राशि
खिलाड़ियों के लिए कमाई का एक रास्ता प्रतियोगिताओं में मिलने वाली पुरस्कार राशि है। झारखंड की खेल व्यवस्था में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियों के आधार पर खिलाड़ियों को सम्मानित करने का प्रावधान है। इसके अलावा असाधारण प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए नकद पुरस्कार का भी प्रावधान बताया गया है।
हालांकि, पुरस्कार राशि आमतौर पर एकमुश्त होती है। खिलाड़ी के लिए असली चुनौती नियमित आमदनी और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
खेल के साथ नौकरी सबसे बड़ा सहारा
खिलाड़ियों के लिए खेल कोटे से मिलने वाली सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरी आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। झारखंड की खेल नीति में खिलाड़ियों के लिए सरकारी रोजगार का प्रावधान है। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में खेल नीति के तहत सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए 2 प्रतिशत आरक्षण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं के लिए सीधी भर्ती के प्रावधान का उल्लेख किया गया है।
रेलवे और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं भी खिलाड़ियों को खेल के साथ रोजगार का अवसर देती रही हैं। इससे खिलाड़ी नौकरी के साथ अपने खेल करियर को भी जारी रख सकते हैं।
लेकिन रोजगार का आंकड़ा अब भी बड़ा सवाल
झारखंड में खिलाड़ियों को रोजगार देने को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। एक रिपोर्ट में राज्य गठन के बाद शुरुआती 23 वर्षों में केवल 44 खिलाड़ियों को रोजगार मिलने का दावा किया गया था।
यही वजह है कि खिलाड़ियों के लिए केवल मेडल जीतना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भरोसा भी चाहिए कि खेल में वर्षों की मेहनत के बाद उनके पास सम्मानजनक और स्थायी रोजगार का विकल्प मौजूद रहेगा।
खिलाड़ी की कमाई में खर्च भी बड़ा फैक्टर
मैदान पर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी की कमाई का हिसाब केवल पुरस्कार राशि से नहीं लगाया जा सकता। प्रशिक्षण, डाइट, खेल किट, जूते, यात्रा, प्रतियोगिताओं की फीस और फिटनेस पर लगातार खर्च होता है।
यानी एक खिलाड़ी के लिए कमाई और खर्च दोनों साथ-साथ चलते हैं। आर्थिक मदद अगर समय पर न मिले तो प्रतिभाशाली खिलाड़ी आर्थिक दबाव के कारण खेल छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
खेल से रोजगार के प्रमुख रास्ते
झारखंड के खिलाड़ियों के लिए खेल को करियर बनाने के बाद आय के प्रमुख रास्ते हैं—
- राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की पुरस्कार राशि
- सरकारी नौकरी में खेल कोटा
- रेलवे और PSU में रोजगार
- कॉरपोरेट प्रायोजन और नौकरी
- कोच या प्रशिक्षक के रूप में करियर
- खेल अकादमी और प्रशिक्षण केंद्र से जुड़कर आय
- स्पोर्ट्स इवेंट, फिटनेस और प्रशिक्षण से जुड़े अवसर
असली सवाल मेडल के बाद का भविष्य
झारखंड में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। राज्य सरकार का खेल विभाग भी बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर जोर देता है। लेकिन खिलाड़ियों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि मेडल जीतने के बाद उनका भविष्य कितना सुरक्षित है?
राष्ट्रीय खेल दिवस पर जरूरत सिर्फ नए खिलाड़ियों को मैदान तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा करियर सिस्टम देने की भी है जहां मेडल के साथ सम्मानजनक रोजगार, नियमित आय और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो। तभी मैदान में बहाया गया खिलाड़ी का पसीना वास्तविक आर्थिक सफलता में बदल सकेगा।


