हजारीबाग जिले के केरेडारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। प्रस्तावित परियोजना के लिए करीब 1839 एकड़ जमीन को अधिग्रहण के दायरे में लाया गया है। इससे क्षेत्र के 11 गांवों के रैयत और जमीन मालिक प्रभावित होंगे।
भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रिया के तहत रैयतों को अपनी जमीन, स्वामित्व और अन्य दावों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। इसके लिए 90 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इस अवधि में संबंधित रैयत अपने दावे और आपत्तियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा कर सकते हैं।
स्थानीय स्तर पर इतने बड़े भू-भाग के अधिग्रहण की खबर से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। जमीन उनकी आजीविका और परिवार की आर्थिक सुरक्षा का प्रमुख आधार है। ऐसे में रैयतों की नजर अब मुआवजा, पुनर्वास और दावों के निपटारे की प्रक्रिया पर है।
अधिग्रहण की जद में आने वाले गांवों में जमीन का सत्यापन, रैयतों के दावों और दस्तावेजों की जांच जैसी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रशासन की ओर से तय समय सीमा के भीतर दावा प्रस्तुत करना रैयतों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
रैयतों के लिए जरूरी: 90 दिनों की अवधि में अपने स्वामित्व से जुड़े कागजात, जमीन का रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार रखकर दावा प्रस्तुत करना होगा, ताकि अधिग्रहण प्रक्रिया में उनके अधिकार और मुआवजे से संबंधित दावे दर्ज हो सकें।


