Thursday, January 15, 2026
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सदन की मर्यादा को बनाए रखने की जवाबदेही हर सदस्यों की है

( 22 नवंबर, झारखंड विधानसभा के 25 वें स्थापना दिवस पर विशेष )

झारखंड विधानसभा 25 वर्ष का युवा हो चुका है। आज से ठीक सात दिन पूर्व झारखंड अलग प्रांत निर्माण के 25 वें वर्ष में प्रवेश पर बहुत ही धूमधाम से राज्य भर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ ।‌ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रांत की खुशहाली और विकास संबंधित कई नहीं योजनाओं की घोषणा की। हम सबों को यह जानना चाहिए कि किसी भी प्रांत के विकास में विधानसभा की बहुत ही अहम भूमिका होती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा उसकी आत्मा कही जाती है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि विधानसभा के सदस्य बनते हैं । इसलिए विधानसभा के हर सदस्यों का नैतिक के कर्तव्य बनता है कि सदन की मर्यादा बनाए रखने के प्रति गंभीर बनें। सदन की मर्यादा बनाए रखने की पूर्ण जवाबदेही विधानसभा सदस्यों की होती है। पक्ष और विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था के दो धड़ा होते हैं, जिनके कंधों पर बारी-बारी से प्रांत की जवाबदेही आती रहती है। सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच स्वस्थ बहस हो, न कि सदस्य गण आपस में ही नोक – झोंक, अनर्गल अलाप और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते रहें।‌ इससे सदन का बहुमूल्य समय बर्बाद हो जाता है। साथ ही सरकार भी ढंग से कोई निर्णय नहीं ले पाती है, जिसका प्रांत के विकास पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए हर सदस्यों को सदन के प्रति गंभीर होना चाहिए। एक दूसरे की बातों को बहुत ही ध्यान से सुनना चाहिए । साथ ही कोई ऐसी बात नहीं बोली जानी चाहिए जो सदन की मर्यादा के विरुद्ध हो।
15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग प्रांत का गठन हुआ था। 22 नवंबर 2000 को पहली झारखंड विधानसभा का गठन हुआ था। इंदर सिंह नामधारी पहली झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष बनें थे। चूंकि झारखंड की पहली विधानसभा का गठन 2000 के बिहार विधानसभा चुनाव में निर्वाचित विधायकों द्वारा किया गया था, जिनके निर्वाचन क्षेत्र नवगठित झारखंड में थे। यह एक त्रिशंकु विधानसभा थी। किसी एक दल या चुनाव पूर्व गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था । आज झारखंड विधानसभा एक विशाल नूतन भवन में तब्दील हो चुका है। यह इस प्रांत के लिए बहुत ही खुशी की बात है। झारखंड विधानसभा अपने स्थापना के प्रथम वर्षगांठ पर से हर वर्ष किसी एक विधायक को ‘बिरसा मुंडा स्मृति उत्कृष्ट विधायक सम्मान’ या उत्कृष्ट विधायक का सम्मान देती चली आ रही है। मेरी दृष्टि से हर वर्ष झारखंड विधानसभा द्वारा किसी एक विधायक को सदन के प्रति उसके अच्छे व्यवहार के लिए उत्कृष्ट विधायक का सम्मान दिया जाना एक सार्थक निर्णय है। इससे सदन के सभी विधायकों के बीच एक अच्छा संवाद जाएगा। उत्कृष्ट विधायक का चयन विधायक के उत्तम कार्य, सदन के अंदर बेहतर आचरण के आधार पर किया जाता है। इसके अतिरिक्त हर वर्ष विधानसभा द्वारा स्थापना दिवस पर कपिलेश्वर प्रसाद स्मृति उत्कृष्ट विधानकर्मी सम्मान और उत्कृष्ट लोक सेवक सम्मान भी दिया जाता है।
22 नवम्बर 2000 को झारखण्ड विधानसभा की स्थापना की गई थी। 2001 में पहला उत्कृष्ट विधायक सम्मान नाला विधायक विश्वेश्वर खॉं को प्रदान किया गया था। अब तक झारखंड विधानसभा का उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार पाने वाले विधायकों के नाम इस प्रकार हैं। विशेश्वर खां, हेमलाल मुर्मू, राजेंद्र प्रसाद सिंह, लोकनाथ महतो, अन्नपूर्णा देवी, राधा कृष्ण किशोर, पशुपति नाथ सिंह, इंदर सिंह नामधारी, जनार्दन पासवान, रघुवर दास, लोबिन हेंब्रम, प्रदीप प्रसाद, स्टीफन मरांडी, विमला प्रधान, मेनका सरदार, नलिन सोरेन, रामचंद्र चंद्रवंशी, विनोद कुमार, रामचंद्र सिंह।
इस वर्ष 22 नवंबर को धनबाद के विधायक राज सिन्हा को उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। राज सिन्हा, धनबाद से विधायक हैं । वे पिछले विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार विधायक बनें। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने युवा नेता राज सिन्हा को धनबाद विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था । राज सिन्हा ने कांग्रेस नेता मन्नान मलिक को पचास हजार से अधिक वोटो से मात दी थी। इसके बाद 2019 में एक बार फिर से भाजपा अलग कमान ने राज सिन्हा पर भरोसा जताया। इस बार भी उन्होंने आला कमान को निराश नहीं किया और दोबारा मन्नान मलिक को तीस हजार से अधिक वोटो से हराया। 2024 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने तीसरी बार राज सिन्हा पर अपना विश्वास जताया। राज सिन्हा ने भी विश्वास को न तोड़ते हुए जीत की हैट्रिक लगाई । इस तरह से भाजपा के अंदर और बाहर एक अलग छवि बनाने में राज सिंह सफल रहे हैं। राज सिन्हा व्यवहार कुशल नेता के रूप में अपनी छवि बनाने में सफल रहे हैं। सदन में भी अपनी बातों को बहुत ही गंभीरता के साथ रखते हैं। खुद को अनर्गल आलाप और व्यक्तिगत का टीका टिप्पणी से भी दूर रखते हैं।
हम सबों को यह जानना चाहिए कि झारखंड विधानसभा आखिर कैसे हर वर्ष एक उत्कृष्ट विधायक की घोषणा करती है ? गत 19 नवंबर को झारखंड विधानसभा के स्पीकर रवींद्रनाथ महतो के आवासीय कार्यालय में ‘उत्कृष्ट विधायक चयन समिति’ की एक बैठक हुई थी । इस बैठक में की अध्यक्षता रविंद्रनाथ महतो की। इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल सहित उत्कृष्ट विधायक चयन समिति के सदस्यगण सम्मिलित हुए थे। चयन समिति ने सर्वानुमति से राज सिन्हा को उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार देने निर्णय लिया। उत्कृष्ट विधायक पुरस्कार के चयन में हर वर्ष इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
उक्त बैठक के बाद विधानसभा के स्पीकर रविंद्र नाथ महतो ने मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा स्थापना दिवस पर इस बार खास आयोजन होगा। रजत जयंती समारोह के अवसर पर चयनित सभी लोगों को सम्मानित किया जाएगा। इस साल स्थापना दिवस पर सम्मानित होने वालों में उत्कृष्ट विधायक के रूप में राज सिन्हा को राजपाल के हाथों सम्मानित किया जाएगा । इसके अलावा पुरस्कार पाने वालों में संतोष कुमार सिंह, संयुक्त सचिव , नीलम कुजूर, प्रशाखा पदाधिकारी, मोहम्मद शाहिद,सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, राकेश कुमार सिंह, उद्यान पर्यवेक्षक, अनुदेशक मंतूराम और रविंद्र पाल को प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा पत्रकारों द्वारा अगर किसी एक पत्रकार का नाम उत्कृष्ट विधायक चयन समिति को दिया जाएगा तब एक पत्रकार को भी सम्मानित किया जाएगा।
झारखंड विधानसभा स्थापना दिवस पर सदन के सभी सदस्यों को यह संकल्प लेने की जरूरत है कि सदन के प्रति उनकी जो संवैधानिक और नैतिक जवाबदेही है उसके प्रति पूरी ईमानदारी के साथ पालन करेंगे । सदन की गरिमा को कभी भी बिगड़ने नहीं देंगे। इसके साथ ही अनर्गल अलाप से खुद को दूर रखेंगे। व्यक्तिगत कोई टीका टिप्पणी नहीं करेंगे। अपने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी बातों को सदन में पूरी मजबूती के साथ रखेंगे। अगर सदन के सदस्य गण ऐसा करते हैं, तो जनता ने जिस उम्मीद के साथ उन्हें जीता कर सदन में भेजा है, उन सबों की आकांक्षाएं पूर्ण होगी। राजनीति जन सेवा का आधार बनें, न कि सिर्फ सत्ता के लिए राजनीति हो। सत्ता की राजनीति ने राजनीति के स्वरूप को ही बिगाड़ कर रख दिया है। इस निमित्त झारखंड वासियों को अपने अपने मत का प्रयोग धर्म, जात पात से ऊपर उठकर  करने की जरूरत है । ऐसे लोगों को चुनकर विधानसभा में भेजने की जरूरत है, जो झारखंड के विकास को ईमानदारी पूर्वक गति दे सके।

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