सरायकेला: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में ACB की कार्रवाई के विरोध में सरकारी कर्मचारियों ने सांकेतिक प्रदर्शन शुरू कर दिया है। झारखंड अनुसचिवीय कर्मचारी संघ के आह्वान पर सोमवार, 12 अक्टूबर से जिले के विभिन्न कार्यालयों में कर्मचारी बांह पर काला बिल्ला लगाकर सरकारी कामकाज कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
इसी क्रम में गम्हरिया प्रखंड सह अंचल कार्यालय के कर्मचारियों ने भी काला बिल्ला लगाकर अपनी नाराजगी जाहिर की। कर्मचारियों का यह विरोध चतरा अनुमंडल कार्यालय के प्रधान लिपिक बासुदेव राम की गिरफ्तारी और ACB की जांच प्रक्रिया को लेकर है।
बासुदेव राम की गिरफ्तारी के बाद विरोध
जानकारी के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 को चतरा अनुमंडल कार्यालय में कार्यरत प्रधान लिपिक बासुदेव राम को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद झारखंड अनुसचिवीय कर्मचारी संघ ने जांच प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। संघ के निर्देश पर कर्मचारियों ने छह दिवसीय सांकेतिक विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन, प्रक्रिया पर सवाल
कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि संगठन भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का विरोध नहीं करता। हालांकि, उनका एतराज ट्रैप मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, निष्पक्षता और निर्धारित नियमों के पालन को लेकर है।
संघ का कहना है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय जांच प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और संबंधित तथ्यों तथा साक्ष्यों की निष्पक्षता से पड़ताल की जानी चाहिए।
स्वतंत्र जांच और सेवा नियमों के पालन की मांग
कर्मचारी संघ ने मांग की है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से पहले शिकायत की प्रमाणिकता, उपलब्ध साक्ष्यों और पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की जाए। संघ का कहना है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि किसी कर्मचारी के अधिकारों का उल्लंघन न हो।
इसके साथ ही संघ ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, सेवा नियमों के कड़ाई से पालन और कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग की है।
जनता के काम प्रभावित नहीं होने देने का दावा
संघ ने स्पष्ट किया है कि काला बिल्ला लगाकर किया जा रहा यह प्रदर्शन सांकेतिक है। कर्मचारियों का कहना है कि विरोध के दौरान आम लोगों के जरूरी सरकारी कामकाज को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
फिलहाल 12 से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस विरोध प्रदर्शन के जरिए कर्मचारी अपनी मांगों और आपत्तियों को प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

