राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने के विरोध में सड़क पर उतरे कांग्रेसी, ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ के नारों से गूंजा शहर
लोहरदगा: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के विरोध में लोहरदगा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काला दिवस मनाया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सूखैर भगत के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई।
जिला स्तरीय इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष सूखैर भगत और विधायक प्रतिनिधि निशिथ जायसवाल ने किया। कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लेकर केंद्र सरकार और चुनाव व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध जताया।
‘वोट चोर गद्दी छोड़’ के नारों से गूंजा शहर
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ और ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए। कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास बताया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध की आवाज को दबाने के बजाय उठाए गए सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की उठाई मांग
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया। नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था और विपक्ष को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता जरूरी है।
कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुट होकर आवाज बुलंद की और कहा कि चुनावी पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा।
लोहरदगा में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन के दौरान लोहरदगा में राजनीतिक माहौल गर्म रहा। जिला कांग्रेस ने प्रदर्शन के माध्यम से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का आह्वान किया।

