भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में डीजीपी नियुक्ति मामले की सुनवाई का हवाला देते हुए तदाशा मिश्रा से स्वेच्छा से इस्तीफा देने की मांग की है।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने डीजीपी नियुक्ति को लेकर अपने पूर्व के फैसलों के पालन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि अदालत ने राज्य सरकार से पुलिस अधिनियम के तहत डीजीपी नियुक्ति के नियम बनाने का कानूनी आधार भी पूछा है। मरांडी के मुताबिक, वरिष्ठ वकीलों की मौजूदगी के बावजूद सरकार अदालत के सवालों से बच नहीं सकी।
उन्होंने कहा कि सरकार को अपने फैसले का कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा। महंगे वकीलों की फौज खड़ी करने से किसी गैरकानूनी फैसले को वैध नहीं बनाया जा सकता और न ही जवाबदेही से बचा जा सकता है।
बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी तदाशा मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी के पद पर तदाशा मिश्रा के होने के बावजूद झारखंड पुलिस की वास्तविक कमान मुख्यमंत्री आवास में बैठे अजय सिंह के हाथों में बताई जा रही है। उन्होंने अजय सिंह के सिपाही से एएसआई बनने का जिक्र करते हुए सवाल किया कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सत्ता के सामने कठपुतली क्यों बनी हुई हैं।
मरांडी ने कहा कि अदालत अपना फैसला करेगी, लेकिन डीजीपी के पास अभी भी अपनी वर्दी, पद और सेवा की गरिमा बचाने का विकल्प है। उन्होंने पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता का जिक्र करते हुए तदाशा मिश्रा को स्वेच्छा से इस्तीफा देने की सलाह दी।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि कुर्सी कुछ दिनों की होती है, लेकिन बदनामी स्थायी हो सकती है। इसलिए तदाशा मिश्रा को समय रहते इस्तीफा देकर अपनी और झारखंड की प्रतिष्ठा बचानी चाहिए।
हालांकि, पुलिस व्यवस्था पर नियंत्रण और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बाबूलाल मरांडी की ओर से लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।


