रांची: झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और स्थानीय युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाव मोर्चा ने आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। मंगलवार को रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में मोर्चा के सदस्यों ने भाषा के संरक्षण, अधिकार और रोजगार के अवसरों को लेकर अपनी मांगें रखीं।
मोर्चा के अनुसार, पिछले करीब दो महीने से झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को उनका अधिकार दिलाने और संरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। इसी कड़ी में 29 सितंबर को मोराबादी से प्रस्तावित भाषा यात्रा निकाली जानी थी, लेकिन हाल में हुई कुछ घटनाओं के चलते इसे स्थगित कर दिया गया।
अब मोर्चा की ओर से 9 अक्टूबर को बापू वाटिका से चर्च कॉम्प्लेक्स तक भाषा यात्रा निकालने की घोषणा की गई है। संगठन ने इसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया है।
प्रेस वार्ता में मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को बचाने का संघर्ष नया नहीं है। उनका आरोप है कि अलग राज्य बनने के बाद भी इन भाषाओं के संरक्षण, विकास और प्रोत्साहन के लिए अपेक्षित स्तर पर काम नहीं हुआ है।
मोर्चा ने भाषा पढ़ने वाले युवाओं के रोजगार का मुद्दा भी उठाया। सदस्यों का कहना है कि जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए दूसरे राज्यों में रोजगार के अवसर सीमित हैं। ऐसे में सरकार को स्थानीय भाषाओं के विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी विचार करना चाहिए।
प्रेस वार्ता में मोर्चा की ओर से झारखंड में मैथिली और भोजपुरी भाषाओं के अभ्यर्थियों को मिलने वाले अवसरों को लेकर भी सवाल उठाया गया। मोर्चा ने पूछा कि राज्य की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े युवाओं को अपेक्षित अवसर क्यों नहीं मिल रहे हैं।


