पलामू: चैनपुर थाना क्षेत्र में 10 वर्षीय बच्ची की हत्या का मामला करीब नौ महीने बाद भी अनसुलझा है। 9 नवंबर 2025 को बच्ची का शव घर से कुछ दूरी पर स्थित एक कुएं से बरामद हुआ था। इससे पहले वह करीब दो दिनों से लापता थी। शव मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू करते हुए तत्कालीन एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की थी।
पुलिस ने गांव और आसपास के इलाकों में सर्च अभियान चलाकर कई संभावित सुराग जुटाने का प्रयास किया, लेकिन अब तक मामले का ठोस खुलासा नहीं हो सका है। पोस्टमार्टम और मेडिकल जांच में बच्ची के साथ दुष्कर्म की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 19 ग्रामीणों को नोटिस जारी किया। इनके मेडिकल और डीएनए से संबंधित परीक्षण भी कराए गए, लेकिन जांच अभी तक किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है।
अब पुलिस मामले में दो संदिग्धों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी में है। चैनपुर थाना प्रभारी लालजी के अनुसार, इस संबंध में एफएसएल को पत्र भेजा गया है। एफएसएल की टीम टेस्ट की तारीख और समय निर्धारित करेगी। पुलिस का कहना है कि टेस्ट और जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
न्याय की मांग को लेकर धरना
इधर, बच्ची को न्याय दिलाने और मामले का जल्द खुलासा करने की मांग को लेकर परिजन और ग्रामीणों ने पलामू समाहरणालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। धरने का समर्थन कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से किए जाने की बात सामने आई है।
प्रदर्शनकारियों की ओर से स्थानीय विधायक आलोक चौरसिया के कथित करीबी एक कार्यकर्ता पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण जांच प्रभावित हो रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी व्यक्ति की दोषसिद्धि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।
परिजनों और ग्रामीणों की मांग है कि बच्ची की मौत की गुत्थी जल्द सुलझाई जाए, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और परिवार को न्याय मिले।
अब सभी की नजर पुलिस की प्रस्तावित लाई डिटेक्टर जांच पर है। क्या इस जांच से पुलिस को कोई अहम सुराग मिल पाएगा और क्या लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे परिवार को मामले में जल्द जवाब मिल सकेगा, यह जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा।


