HomeJharkhandशिक्षा बचाने का संघर्ष और तेज होगा : आइशी घोष

शिक्षा बचाने का संघर्ष और तेज होगा : आइशी घोष

रांची:- एसएफआई और डीवाईएफआई झारखंड राज्य कमिटियों की बैठक रांची में संपन्न हुई। बैठक को संबोधित करते हुए जेएनयू छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष और एसएफआई की अखिल भारतीय संयुक्त सचिव आइशी घोष ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए संघर्ष को और तेज किया जाएगा।

आइशी घोष ने कहा कि 1990 के दशक से ही देश की शिक्षा नीति में व्यवसायीकरण, केंद्रीकरण और सांप्रदायीकरण को बढ़ावा दिया गया, जिसका शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा को कॉरपोरेट मुनाफे के लिए खोलने का काम किया है।

उन्होंने दावा किया कि नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार देशभर में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं और शिक्षण संस्थानों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के विस्तार के बजाय सरकारी संस्थानों को कमजोर करने की प्रक्रिया चिंता का विषय है।

आइशी घोष ने परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नीट-यूजी पेपर लीक जैसे मामलों ने देश की परीक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर किया है। उन्होंने प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने नीट परीक्षा की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि कोचिंग आधारित परीक्षा व्यवस्था ने छात्रों पर दबाव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के मानसिक दबाव और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर गंभीर कदम उठाने चाहिए।

जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितता का मुद्दा

बैठक को संबोधित करते हुए डीवाईएफआई के संयुक्त सचिव विकास झा ने झारखंड में जेपीएससी की सिविल सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ओएमआर शीट में गड़बड़ी, परीक्षा में धांधली के आरोप और संबंधित मामलों में हुई कार्रवाई से छात्रों एवं अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि झारखंड गठन के बाद जेपीएससी और जेएसएससी की कई परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने सरकार से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अभ्यर्थियों की शिकायतों का स्थायी समाधान करने की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि अभ्यर्थियों और छात्र-युवाओं के आंदोलनों के बाद सरकार द्वारा विभिन्न भर्ती परीक्षाओं से जुड़े फैसले लिए गए, लेकिन न्यायालयी प्रक्रिया के कारण कई मामलों में स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। सरकार को अभ्यर्थियों और युवाओं को इस कानूनी पेचीदगी से निकालने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

एसएफआई ने छात्रों और युवाओं से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और रोजगार के सवाल पर छात्र-युवा एकजुट होकर संघर्ष जारी रखें। वक्ताओं ने कहा कि सीमित रोजगार के अवसरों के बीच सरकारी भर्ती परीक्षाएं युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन्हें भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं से मुक्त कराना जरूरी है।

बैठक में एसएफआई के संयोजक दानिश खान, सोनाली, ओजस्वी राज, अमन, श्री चरण, फैजान तथा डीवाईएफआई के मोहन मंडल, अमित मुंडा, फराज अब्बास, नौशाद, प्रजा पासवान समेत दर्जनों छात्र-युवा मौजूद रहे।

बैठक के अंत में एसएफआई संयोजक दानिश खान और डीवाईएफआई के मोहन मंडल ने शिक्षा, रोजगार और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के मुद्दे पर संघर्ष को आगे बढ़ाने की बात कही।

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