रांची:- झारखंड सरकार के श्रम विभाग के अंतर्गत भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (BOCW) की योजनाओं को मजदूरों तक पहुंचाने वाले श्रमिक मित्रों में लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। श्रमिक मित्रों ने बकाया भुगतान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
वर्ष 2016 में प्रखंड स्तर पर श्रमिक मित्रों का चयन किया गया था। चयन कमेटी के माध्यम से नियुक्ति पत्र मिलने के बाद से वे लगातार अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। उनका मुख्य कार्य सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर मजदूरों का श्रम विभाग में निबंधन कराना और उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है।
श्रमिक मित्रों का कहना है कि वे ऐसे दूरदराज इलाकों तक पहुंचते हैं, जहां कई बार सरकारी कर्मियों और विभागीय अधिकारियों का पहुंचना भी मुश्किल होता है। इसके बावजूद उन्हें लंबे समय से उनके कार्य का मानदेय नहीं मिला है।
छह वर्षों से भुगतान लंबित होने का दावा
श्रमिक मित्रों के अनुसार, पूर्व में प्रति मजदूर निबंधन पर 10 रुपये और योजना का लाभ दिलाने पर भी 10 रुपये की दर से मानदेय दिया जाता था। इसके अलावा श्रम शक्ति अभियान, सरकार आपके द्वार और कोरोना काल में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) से जुड़े कार्यों में भी उन्होंने सेवाएं दीं।
श्रमिक मित्रों का दावा है कि करीब छह वर्षों से उनका मानदेय लंबित है। भुगतान नहीं होने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है।
श्रमिक मित्रों के मुताबिक, उच्च न्यायालय की ओर से भी बकाया मानदेय का भुगतान छह माह के अंदर करने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद भुगतान नहीं होने से उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है।
भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन
श्रमिक मित्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। संघ के अनुसार, पहले धरना-प्रदर्शन और इसके बाद जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल एवं अनशन का रास्ता अपनाया जाएगा।
श्रमिक मित्रों ने सरकार और श्रम विभाग से वर्षों से लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान करने तथा भविष्य में मानदेय नियमित करने की मांग की है। उनका कहना है कि आर्थिक परेशानी दूर होने पर वे मजदूरों और सरकार के बीच सेतु की भूमिका निभाते हुए अपना कार्य और बेहतर तरीके से जारी रख सकेंगे।


