रांची। खनिज क्षेत्र से जुड़े संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड की राजनीति में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता और विधायक जयराम महतो ने प्रस्तावित खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।
जयराम महतो ने अपने पत्र में विधेयक को लेकर चिंता जताई है और केंद्र सरकार से झारखंड के हितों को ध्यान में रखते हुए इसके प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि खनिज संपदा झारखंड की अर्थव्यवस्था और यहां के लोगों के अधिकारों से सीधे जुड़ी हुई है, इसलिए इससे संबंधित किसी भी बड़े फैसले में राज्य के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
झारखंड के अधिकारों को लेकर उठाए सवाल
जयराम महतो ने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े फैसलों का सीधा प्रभाव यहां के स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदायों पर पड़ता है। ऐसे में खनिज क्षेत्र में बदलाव से पहले इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि विधेयक के प्रावधानों की समीक्षा की जाए और झारखंड के हितों तथा स्थानीय लोगों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
विधेयक को लेकर बढ़ सकती है राजनीतिक सरगर्मी
जयराम महतो के इस कदम के बाद खनिज संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अन्य राजनीतिक दलों और जनसंगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है।
खनिज संसाधनों पर अधिकार, रॉयल्टी, स्थानीय हिस्सेदारी और राज्य के हित जैसे मुद्दे झारखंड की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में जयराम महतो का प्रधानमंत्री को पत्र लिखना इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला सकता है।


