JSSC का अलग-अलग नियमों पर सवाल, कहीं नियुक्ति तो कहीं प्रमाण पत्र के नाम पर रिजल्ट रोका
रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (नन क्रीमी लेयर) प्रमाण पत्र को लेकर अलग-अलग मापदंड अपनाए जाने का मामला सामने आया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि एक परीक्षा में अद्यतन प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की गई, जबकि दूसरी परीक्षा में आवेदन वर्ष के प्रमाण पत्र को अनिवार्य बताते हुए 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोक दिया गया है। इससे परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
सुनील कुमार झा, रांची
झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अभ्यर्थी जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में नियमों की स्पष्टता और एकरूपता की मांग करते रहे हैं। इसी क्रम में अब जेएसएससी की अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र के आधार पर अपनायी गयी प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं।
अभ्यर्थियों के अनुसार, कुछ नियुक्तियों में प्रमाण पत्र सत्यापन के दौरान आवेदन की अंतिम तिथि तक या उससे पहले जारी प्रमाण पत्र के साथ संबंधित सत्यापन वर्ष का प्रमाण पत्र भी देखा गया। वहीं, दूसरी ओर कुछ मामलों में केवल सत्यापन वर्ष में जारी अद्यतन प्रमाण पत्र को आधार मानते हुए नियुक्ति की अनुशंसा कर दी गयी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर एक ही आयोग की अलग-अलग परीक्षाओं में अलग-अलग व्यवस्था लागू की जाती है, तो इससे समान परिस्थितियों वाले अभ्यर्थियों के साथ असमान व्यवहार की स्थिति बनती है। उनका आग्रह है कि आयोग इस मामले में स्पष्ट नियम जारी करे और सभी नियुक्ति परीक्षाओं में एक समान प्रक्रिया अपनायी जाए।
विज्ञापन में प्रमाण पत्र को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं
अभ्यर्थियों की मुख्य आपत्ति यह भी है कि नियुक्ति परीक्षा के विज्ञापन में प्रमाण पत्र के वर्ष को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती। उनका कहना है कि आवेदन के समय भी संबंधित प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जमा नहीं कराया जाता। ऐसे में बाद में प्रमाण पत्र के वर्ष को लेकर अलग-अलग शर्तें सामने आने से अभ्यर्थियों को परेशानी होती है।
महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में अद्यतन प्रमाण पत्र से नियुक्ति की अनुशंसा
महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) के अद्यतन प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की गयी। बताया गया कि कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे, जिनके पास आवेदन वर्ष 2023 का प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था।
इनमें कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया गया। हालांकि, बाद में कुछ मामलों में विभागीय स्तर पर नियुक्ति रोकने की कार्रवाई की गयी और संबंधित अभ्यर्थियों को नोटिस भी जारी किया गया।
माध्यमिक आचार्य परीक्षा में 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोका
दूसरी ओर, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में प्रमाण पत्र को लेकर अलग स्थिति सामने आयी है। अलग-अलग विषयों में प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए बुलाये गये 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोक दिया गया है।
बताया गया है कि इन अभ्यर्थियों से आवेदन के समय और प्रमाण पत्र सत्यापन के समय से संबंधित वित्तीय वर्ष के ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। उर्दू विषय में प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए पहुंचे एक अभ्यर्थी से भी आवेदन की अंतिम तिथि तक या उससे पहले जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया।
अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब एक नियुक्ति प्रक्रिया में अद्यतन प्रमाण पत्र को स्वीकार करते हुए नियुक्ति की अनुशंसा की गयी, तो दूसरी नियुक्ति प्रक्रिया में आवेदन वर्ष के प्रमाण पत्र को लेकर इतनी सख्ती क्यों बरती जा रही है।
प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर क्या है स्थिति?
ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (नन क्रीमी लेयर) प्रमाण पत्र संबंधित वित्तीय वर्ष की आय और पात्रता के आधार पर जारी किये जाते हैं। भर्ती प्रक्रिया लंबी होने की स्थिति में प्रमाण पत्र सत्यापन के समय अद्यतन प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि, अभ्यर्थियों की आपत्ति इस बात को लेकर है कि आवेदन वर्ष के प्रमाण पत्र की अनिवार्यता और नियुक्ति के समय अद्यतन प्रमाण पत्र को लेकर आयोग को पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि बाद में अभ्यर्थियों को नुकसान न उठाना पड़े।
अभ्यर्थियों ने की समान नियम लागू करने की मांग
अभ्यर्थियों ने जेएसएससी से मांग की है कि ईडब्ल्यूएस और ओबीसी (एनसीएल) प्रमाण पत्र को लेकर सभी नियुक्ति परीक्षाओं में एक समान मापदंड तय किया जाए। साथ ही, जिन अभ्यर्थियों का रिजल्ट प्रमाण पत्र के कारण रोका गया है, उनके मामलों की दोबारा समीक्षा कर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा पास करने के बाद केवल प्रमाण पत्र के वर्ष को लेकर रिजल्ट रोकने या नियुक्ति प्रभावित होने से उनका भविष्य अधर में लटक जाता है। इसलिए आयोग को नियमों की स्थिति स्पष्ट करते हुए पारदर्शी और एकरूप प्रक्रिया अपनानी चाहिए।


