रामगढ़:– बरकाकाना ओपी क्षेत्र के हेहल स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड में हुए भट्ठी ब्लास्ट के बाद अब मुआवजे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हादसे में तीन तकनीकी कर्मचारियों की मौत और एक इंजीनियर के गंभीर रूप से घायल होने के बाद कंपनी प्रबंधन, मृतकों के परिजनों, ग्रामीणों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी।
वार्ता के बाद जेएलकेएम के केंद्रीय उपाध्यक्ष रवि कुमार महतो की ओर से बताया गया कि प्रत्येक मृतक के आश्रित को कुल 31 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति बनी है। इसमें 30 लाख रुपये का चेक और अंतिम संस्कार के लिए एक लाख रुपये नकद शामिल हैं। वहीं घायल इंजीनियर के इलाज का पूरा खर्च कंपनी द्वारा उठाने और उसके स्वस्थ होने तक वेतन जारी रखने की बात कही गई है।
31 लाख के समझौते के बाद 51 लाख का दावा
मुआवजे को लेकर विवाद तब बढ़ गया, जब पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने दावा किया कि उनके प्रयासों से मृतकों के परिजनों के लिए 51-51 लाख रुपये और घायल कर्मचारी के लिए 30 लाख रुपये का मुआवजा सुनिश्चित कराया गया था।
अंबा प्रसाद के मुताबिक, हादसे की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने घटनास्थल पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और कंपनी प्रबंधन व प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुआवजे की राशि सुनिश्चित होने तक फैक्ट्री संचालन पर रोक की बात प्रशासन की ओर से कही गई थी।
समझौते और दावे में बड़ा अंतर
एक तरफ जहां सामने आए समझौते में प्रत्येक मृतक के आश्रित को 31 लाख रुपये देने की बात कही गई है, वहीं अंबा प्रसाद की ओर से 51 लाख रुपये का दावा किया गया है। दोनों राशियों के बीच 20 लाख रुपये का अंतर होने के कारण मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवारों को अधिक मुआवजा दिलाने के नाम पर उन्हें बुलाया गया, लेकिन बाद में तय राशि से कम भुगतान किया गया। उन्होंने इसे परिवारों के साथ अन्याय बताते हुए भाजपा और कंपनी प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, 51 लाख रुपये की कथित सहमति से संबंधित कोई अलग लिखित दस्तावेज इस मामले में सामने नहीं आया है। ऐसे में अंतिम रूप से तय मुआवजे की राशि की पुष्टि लिखित समझौते और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों से ही हो सकेगी।
हादसे में तीन कर्मचारियों की गई जान
भट्ठी ब्लास्ट की इस घटना में शिफ्ट इंचार्ज संजीव केसरी, इंजीनियर अभिषेक पांडे और इंजीनियर विनीत महतो की मौत हो गई थी। वहीं इंजीनियर तरुण रवानी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
बताया गया कि टरबाइन पैनल में ओवरहीटिंग के बाद तकनीकी खराबी उत्पन्न हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इमरजेंसी सिस्टम चलाने का प्रयास किया गया, लेकिन इसके बाद तेज धमाका हुआ और आग की चपेट में कर्मचारी आ गए।
आंदोलनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने की बात
वार्ता में मुआवजे के अलावा हादसे के बाद हुए आंदोलन से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि सड़क जाम और आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी नहीं करने पर भी सहमति बनी है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल मुआवजे की वास्तविक राशि को लेकर है। 31 लाख रुपये के लिखित समझौते और 51 लाख रुपये के दावे के बीच स्थिति तभी साफ होगी, जब कंपनी और आश्रितों के बीच हुए अंतिम दस्तावेज तथा भुगतान का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आएगा।


