रांची। झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और पारंपरिक पर्वों को शहरवासियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से राजधानी रांची में आगामी 4 नवंबर को भव्य ‘डहरे सोहराय’ का आयोजन किया जाएगा। वृहद झारखंड कला संस्कृति के तत्वावधान में आयोजित यह सांस्कृतिक यात्रा मोरहाबादी मैदान से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक जाएगी। इसमें रांची जिले के सभी 14 प्रखंडों से कुड़मी समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे।
रांची प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संगठन की सदस्य बेबी महतो ने बताया कि झारखंड के कुड़मी बहुल क्षेत्रों में सोहराय महापर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व खेती-किसानी में सहयोग करने वाले पशुओं, प्रकृति और पूर्वजों के प्रति आभार एवं सम्मान प्रकट करने का प्रतीक है।
पारंपरिक वेशभूषा और लोक संस्कृति की दिखेगी झलक
डहरे सोहराय के दौरान गांवों से आने वाले लोग पारंपरिक कृषि उपकरण, सोहराय पूजा-पाठ की सामग्री और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ शामिल होंगे। इस दौरान आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से ग्रामीण जीवन और सोहराय पर्व की परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों को ग्रामीण परिवेश में मनाए जाने वाले पारंपरिक पर्व की जीवंत झलक दिखाना है, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।
लोक संस्कृति और परंपरा को बचाने की पहल
संगठन के प्रवक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के दौर में शहरी समाज अपनी समृद्ध लोक-संस्कृति और जड़ों से दूर होता जा रहा है। ऐसे में डहरे सोहराय के माध्यम से कुड़मी समुदाय की परंपरा, भाषा, संस्कृति और पर्वों को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन से शहरी आबादी को सोहराय पर्व और कुड़मी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।
