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बोकारो में डाक टिकट प्रदर्शनी: दुर्लभ टिकटों में दिखी देश-विदेश की संस्कृति, बच्चों ने इतिहास को करीब से जाना

बोकारो: डाक टिकटों के प्रति रुचि विकसित करने और विद्यार्थियों को इतिहास, सभ्यता व संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य से बोकारो में फिलेटली यानी डाक टिकट संग्रह प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में विभिन्न डाक टिकट संग्रहकर्ताओं ने अपने अनमोल संग्रह प्रदर्शित किए। देश-विदेश के दुर्लभ डाक टिकटों और मिनिएचर शीट को देखकर विद्यार्थी काफी उत्साहित नजर आए।

डाक टिकटों में छिपी है इतिहास की कहानी

प्रदर्शनी में प्रदर्शित डाक टिकटों के माध्यम से विद्यार्थियों को अलग-अलग देशों की ऐतिहासिक घटनाओं, महान व्यक्तित्वों, सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को जानने का अवसर मिला। छोटे-छोटे डाक टिकटों पर दर्ज इतिहास ने बच्चों की जिज्ञासा बढ़ाई। विद्यार्थियों ने टिकटों को ध्यान से देखा और उनके महत्व को समझने की कोशिश की।

20 से 25 वर्षों से टिकटों का संग्रह कर रहे हैं सतीश कुमार

डाक टिकट संग्रहकर्ता सतीश कुमार ने बताया कि वह पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार डाक टिकटों का संग्रह कर रहे हैं। उनके अनुसार, डाक टिकट जमा करना केवल शौक नहीं, बल्कि दुनिया के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हर टिकट अपने भीतर किसी देश, घटना या व्यक्तित्व से जुड़ी कहानी समेटे होता है।

चार साल की उम्र से शुरू हुआ सीतेश कुमार का शौक

संग्रहकर्ता सीतेश कुमार ने बताया कि उन्हें महज चार वर्ष की उम्र से ही डाक टिकट इकट्ठा करने का शौक लग गया था। धीरे-धीरे यह शौक उनके जीवन का जुनून बन गया। आज उनके पास लाखों रुपये मूल्य के दुर्लभ डाक टिकटों का विशाल संग्रह मौजूद है। उनके संग्रह में शामिल टिकटों को देखना विद्यार्थियों के लिए खास अनुभव रहा।

पुराने सिक्कों और अखबारों को भी सहेज रहे प्रभात रंजन

संग्रहकर्ता प्रभात रंजन ने बताया कि वह डाक टिकटों के साथ-साथ पुराने सिक्कों और ऐतिहासिक अखबारों का भी संग्रह करते हैं। उनके अनुसार, ऐसी ऐतिहासिक वस्तुएं बीते समय की घटनाओं, सामाजिक बदलावों और सांस्कृतिक विरासत को समझने में मदद करती हैं। इन वस्तुओं को सहेजना इतिहास को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

बच्चों में दिखा खास उत्साह

प्रदर्शनी में पहुंचे बच्चों ने दुर्लभ डाक टिकटों और ऐतिहासिक संग्रहों को उत्सुकता से देखा। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को किताबों से बाहर निकलकर इतिहास को एक अलग नजरिए से समझने का अवसर दिया। साथ ही, संग्रह करने की आदत विकसित करने और पुरानी धरोहरों को सहेजने के प्रति भी उन्हें प्रेरित किया।

बाइट:

  • सतीश कुमार, डाक टिकट संग्रहकर्ता
  • प्रभात रंजन, डाक टिकट एवं ऐतिहासिक वस्तु संग्रहकर्ता
  • सीतेश कुमार, डाक टिकट संग्रहकर्ता

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