रांची: झारखंड में कैंसर, मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCD) से निपटने के लिए एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल लागू करने की तैयारी है। राज्य सरकार की ओर से तैयार इस मॉडल को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंजूरी दी है। इसके साथ झारखंड को इस तरह के एकीकृत NCD मॉडल के लिए देश का पहला मॉडल राज्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ा है।
एक ही व्यवस्था में कई गंभीर बीमारियों पर काम
नए मॉडल में अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था के बजाय साझा स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से रोकथाम, स्क्रीनिंग, इलाज और फॉलोअप पर जोर दिया जाएगा। इसमें कैंसर, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग के साथ तंबाकू नियंत्रण, मुंह की बीमारियों और प्रशामक देखभाल जैसे क्षेत्रों को भी जोड़ा जाएगा।
शुरुआती जांच पर रहेगा विशेष जोर
मॉडल का उद्देश्य बीमारी गंभीर होने के बाद इलाज करने के बजाय शुरुआती स्तर पर ही जोखिम की पहचान करना और समय पर जांच एवं उपचार उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर स्क्रीनिंग, बीमारी की पहचान, मरीजों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफरल की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
भारत में पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर डायबिटीज, हाइपरटेंशन और सामान्य कैंसर की स्क्रीनिंग की व्यवस्था संचालित है। झारखंड का प्रस्तावित मॉडल इन सेवाओं को एक साझा और समन्वित व्यवस्था में जोड़ने पर केंद्रित है।
डिजिटल निगरानी और लगातार फॉलोअप
एकीकृत मॉडल में डिजिटल माध्यम से मरीजों की जानकारी और उपचार की निगरानी को भी मजबूत करने की योजना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच में बीमारी या जोखिम सामने आने के बाद मरीज इलाज से बाहर न हो और उसका नियमित फॉलोअप जारी रहे।
आगे पूरे देश में लागू करने की योजना
केंद्रीय मंजूरी के बाद झारखंड को इस मॉडल के लिए मॉडल राज्य के तौर पर विकसित करने की योजना है। राज्य में इसके क्रियान्वयन और अनुभव के आधार पर इसे भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी की जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास मुख्य रूप से गैर-संचारी बीमारियों की रोकथाम, शुरुआती पहचान, समय पर इलाज और निरंतर देखभाल को एक ही प्रणाली से जोड़ने पर केंद्रित है।


