रांची:– JSSC CGL परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक मामले की जांच कर रही CID ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को साइबर थाने में रिमांड पर लिये गये मुख्य आरोपी अभय तिवारी से जांच टीम ने कई घंटे पूछताछ की। इस दौरान उसके पुराने बयानों और जांच में सामने आये साक्ष्यों का मिलान किया गया। CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से पहले प्रश्नों के उत्तर किस तरह और किन लोगों के जरिए अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए।
अभय तिवारी के साथ उसके भाई अक्षय कुमार तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी से भी पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी तीनों से अलग-अलग और कई बार आमने-सामने बैठाकर भी जानकारी जुटा रही है। इससे पहले CID इस मामले में 18 अन्य संदिग्धों और संबंधित लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
अभय के बयान से जांच को मिली अहम जानकारी
जांच में अभय तिवारी की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उसके पहले के बयान के आधार पर परीक्षा से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। बताया गया है कि जब TDPL को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी से हटाकर वेबल एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई, उसी दौरान अभय का संपर्क वेबल से जुड़े उमाकांत प्रमाणिक से हुआ था।
आरोप है कि इसी संपर्क के जरिए परीक्षा से पहले प्रश्नों के उत्तर हासिल किए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि अभय का भाई अक्षय और पत्नी सुषमा भी परीक्षा में सफल हुए थे।
अभय ने कथित तौर पर बताया था कि बोकारो के एक क्वार्टर में 16 अभ्यर्थियों को परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर याद कराए गए थे। इस दौरान मिथिलेश सिंह और राकेश सिंह की मौजूदगी का भी जिक्र सामने आया है।
जांच के मुताबिक, करीब 65 प्रश्नों के उत्तर परीक्षा से पहले उपलब्ध कराए गए थे और इसके बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से कथित तौर पर 12 लाख रुपये लिए गए। इसी मामले में अभय तिवारी के 48वीं रैंक हासिल करने की बात भी जांच के दायरे में है।
मो एबाद के बयान से सामने आई एक और कड़ी
मामले में आरोपी मो एबाद से पूछताछ के दौरान भी जांच एजेंसी को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। उसके बयान में JPSC की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता पर अभय तिवारी और अन्य आरोपियों के साथ कथित मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
CID फिलहाल पूरे मामले की दो दिशाओं में जांच कर रही है। पहली कड़ी प्रश्नपत्र और उसके उत्तर उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क से जुड़ी है, जबकि दूसरी में उन एजेंटों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है, जिन्होंने अभ्यर्थियों को इस कथित नेटवर्क तक पहुंचाया।
सरकार विवादों में घिरी JSSC CGL परीक्षा को पहले ही रद्द कर चुकी है। अब CID यह पता लगाने में जुटी है कि कथित पेपर लीक की शुरुआत कहां से हुई, कितने अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचे और इस पूरे नेटवर्क में पैसों का लेनदेन किन-किन लोगों के जरिए हुआ।


