Home Jharkhand MMDR संशोधन कानून के खिलाफ झामुमो का आंदोलन तेज, विनोद पांडेय बोले-...

MMDR संशोधन कानून के खिलाफ झामुमो का आंदोलन तेज, विनोद पांडेय बोले- ‘झारखंड के अधिकारों से समझौता नहीं, जिला मुख्यालयों तक पहुंचेगा उलगुलान

0
4

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन कानून-2026 (MMDR) के खिलाफ आंदोलन को और व्यापक करने का ऐलान किया है। झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि पार्टी का विरोध-प्रदर्शन अब प्रखंड मुख्यालयों से आगे गांव-गांव तक पहुंच रहा है। 19 सितंबर को राज्य के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों पर झामुमो ने विरोध प्रदर्शन किया। अब अगले चरण में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन की तैयारी है।

विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड की जनता जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से जुड़े अपने अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगी। उनके मुताबिक, झामुमो एमएमडीआर संशोधन कानून को राज्य के खनिज राजस्व और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता से जुड़े मुद्दे के तौर पर देखता है। पार्टी का कहना है कि खनिज संसाधनों के दोहन का पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव झारखंड को झेलना पड़ता है, इसलिए राज्य के राजस्व और अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

1.36 लाख करोड़ के बकाये का मुद्दा भी उठाया

विनोद पांडेय ने झारखंड के करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के कथित पुराने बकाये का मुद्दा भी उठाया। राज्य सरकार लंबे समय से कोयला कंपनियों से जुड़े विभिन्न मदों में इस राशि के बकाये का दावा करती रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी जून 2026 में नीति आयोग की बैठक में केंद्र के समक्ष 1.36 लाख करोड़ रुपये के कोयला बकाये का मुद्दा उठाया था।

राज्य सरकार की ओर से इस बकाये में भूमि मुआवजा, कॉमन कॉज से जुड़े दावे और वॉश्ड कोल रॉयल्टी समेत अलग-अलग मदों को शामिल किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, बकाये की राशि और उसके कानूनी आधार को लेकर केंद्र और राज्य के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

प्रखंड के बाद जिला और राज्य स्तर पर आंदोलन

झामुमो के मुताबिक, आंदोलन के पहले चरण में प्रखंड मुख्यालयों पर विरोध दर्ज कराया गया है। अब इसे जिला मुख्यालयों तक ले जाने की तैयारी है। इसके बाद राज्य स्तर पर बड़े आंदोलन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। विनोद पांडेय ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को सड़क के साथ-साथ संवैधानिक और कानूनी मंचों पर भी उठाएगी।

झामुमो का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार झारखंड के हितों से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, एमएमडीआर संशोधन को लेकर केंद्र और राज्य के बीच कानूनी व राजनीतिक मतभेद पहले से ही सामने आते रहे हैं और झारखंड सरकार इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दे चुकी है।

विनोद पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने इसे झामुमो का ही नहीं, बल्कि राज्य के खनिज संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।

नोट: ऊपर दिए गए 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये से जुड़े आंकड़े और कानून के प्रभाव संबंधी बातें संबंधित राज्य सरकार/राजनीतिक पक्ष के दावों के रूप में प्रस्तुत की गई हैं; इन पर केंद्र और राज्य के बीच मतभेद हैं।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here