सरायकेला-खरसावां:– चांडिल वन क्षेत्र के कुकड़ू प्रखंड स्थित तिरूलडीह गांव में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बना हुआ है। बीती रात दलमा की ओर से आए हाथियों के झुंड ने हरिजन बस्ती में घुसकर करीब आधा दर्जन घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। हाथियों ने घरों की दीवारें तोड़ने के साथ अंदर रखा अनाज भी बर्बाद कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, हाथियों के उत्पात से विजय कालिंदी, कृष्ण कालिंदी, मोहन साईं कालिंदी और प्रेम साईं कालिंदी समेत कई परिवार प्रभावित हुए हैं। रात के समय जब ग्रामीण अपने घरों में सो रहे थे, तभी हाथियों ने घरों की दीवारों को तोड़ना शुरू कर दिया। दीवार टूटने की तेज आवाज सुनकर लोगों में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीण जान बचाकर घरों से बाहर निकलने लगे।
इसी दौरान भागने के क्रम में एक महिला जमीन पर गिर गई, जिससे उसके हाथ में गंभीर चोट आई और हाथ टूट गया। परिजन और ग्रामीण उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि गनीमत रही कि टूटती हुई दीवार सो रहे लोगों के ऊपर नहीं गिरी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
शाम होते ही गांव में फैल जाती है दहशत
ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों के लगातार गांव में प्रवेश करने के कारण शाम होते ही लोगों में डर का माहौल बन जाता है। बिजली गुल होने की स्थिति में खतरा और बढ़ जाता है। हाथियों के डर से ग्रामीण रातभर जागकर अपने परिवार और घरों की सुरक्षा करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक तरफ बरसात का मौसम है और दूसरी तरफ दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से आने वाले हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वन विभाग की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
बंगाल-झारखंड वन विभाग पर जिम्मेदारी टालने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के वन विभाग के बीच हाथियों को लेकर समन्वय की कमी है। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों राज्यों के विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हैं, जबकि हाथियों का झुंड लगातार जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहा है।
मुआवजा और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग
ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त मकानों और बर्बाद हुए अनाज का तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा आबादी वाले क्षेत्रों को हाथियों से सुरक्षित रखने के लिए सोलर फेंसिंग, प्रशिक्षित पटाखा दल और क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की स्थायी तैनाती की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि झारखंड और पश्चिम बंगाल के वन विभाग संयुक्त रूप से हाथियों की ट्रैकिंग करें और उनके गांव में प्रवेश को रोकने के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार करें। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।


