जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प और पत्थरबाजी के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित कांग्रेस जिला मुख्यालय तिलक पुस्तकालय के बाहर 12 अक्टूबर को हुई इस घटना के मामले में दंडाधिकारी रजनीश कुमार मिश्रा की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें निखिल तिवारी, मोहम्मद सेराज उर्फ झेलन राजू, शशांक शेखर और दीपू शर्मा समेत 50 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है।
प्राथमिकी में हंगामा करने, पत्थरबाजी, पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के दौरान शामिल रहे लोगों की पहचान करने के लिए वीडियो क्लिप और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद ली जा रही है।
JNU से जुड़े मामले को लेकर प्रदर्शन के दौरान हुआ था विवाद
जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर को बिष्टुपुर स्थित कांग्रेस जिला मुख्यालय तिलक पुस्तकालय के बाहर उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े एक मामले को लेकर भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करने पहुंचीं। इसी दौरान कांग्रेस और भाजपा के समर्थक आमने-सामने आ गए।
दोनों पक्षों के बीच पहले नारेबाजी हुई। इसके बाद विवाद बढ़ने पर मारपीट और पत्थरबाजी की घटना सामने आई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना में दोनों पक्षों के सात से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी।
दंडाधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया मामला
घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत नहीं दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। दंडाधिकारी रजनीश कुमार मिश्रा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की।
इस मामले में निखिल तिवारी, मोहम्मद सेराज उर्फ झेलन राजू, शशांक शेखर और दीपू शर्मा को नामजद किया गया है। इनके अलावा 50 अज्ञात लोगों को भी प्राथमिकी में आरोपित बनाया गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
पत्थरबाजी और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप
दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि घटना के दौरान हंगामा और पत्थरबाजी की गई। साथ ही, पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप भी शामिल हैं। हालांकि, आरोपितों की भूमिका और घटना में उनकी संलिप्तता की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विवाद किस परिस्थिति में बढ़ा और पत्थरबाजी में किन लोगों की भूमिका थी। इसके लिए घटनास्थल से संबंधित वीडियो क्लिप और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
वीडियो फुटेज के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस प्राथमिकी में नामजद लोगों के साथ-साथ उन अज्ञात व्यक्तियों की भी पहचान करने में जुटी है, जो घटना के दौरान मौके पर मौजूद थे। जांच के दौरान वीडियो फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लोगों की भूमिका का आकलन किया जाएगा।
साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि घटना में राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच टकराव, पत्थरबाजी और पुलिस के कार्य में बाधा डालने के आरोप शामिल हैं।

