ड्यूटी नहीं होने के बावजूद काम पर बुलाने का आरोप, इलाज में सहयोग नहीं मिलने से परिजनों में आक्रोश; आश्रित को नौकरी और उचित मुआवजे की मांग
बाघमारा (धनबाद): बीसीसीएल एरिया-04 अंतर्गत सलानपुर कोलियरी में संचालित आरके माइंस आउटसोर्सिंग कंपनी में कार्यरत माइनिंग सरदार श्यामल दास की कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक सलानपुर बस्ती का निवासी था। उसकी मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। गुरुवार को परिजनों ने शव को कंपनी के बेसकैंप के मुख्य द्वार पर रखकर धरना शुरू कर दिया। इस कारण कंपनी का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। कंपनी के अन्य कर्मी भी परिजनों के समर्थन में आंदोलन में शामिल हो गए हैं।
ड्यूटी नहीं होने पर भी काम पर बुलाने का आरोप
मृतक के परिजनों का आरोप है कि बीते 30 अगस्त को श्यामल दास की ड्यूटी नहीं थी, इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन ने दबाव बनाकर उन्हें काम पर बुलाया था। इसी दौरान तनाव के बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह कंपनी परिसर में गिर पड़े। गिरने से उनके सिर में गंभीर चोट आई।
परिजनों के मुताबिक, घायल अवस्था में उन्हें पहले स्थानीय नर्सिंग होम ले जाया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए धनबाद भेजा गया। करीब एक महीने तक इलाज चलने के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें कोलकाता ले जाया गया। वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
इलाज में सहयोग नहीं मिलने से नाराज परिजन
परिजनों का कहना है कि श्यामल दास के घायल होने के बाद कंपनी प्रबंधन ने उनके इलाज की सुध नहीं ली और न ही कंपनी की ओर से कोई स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई। परिजनों के अनुसार, उन्होंने कई बार प्रबंधन से संपर्क किया, लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
इसी नाराजगी के चलते परिजनों ने शव के साथ कंपनी के मुख्य द्वार पर धरना शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि अधिग्रहित जमीन के बदले उचित मुआवजा दिया जाए और मृतक के आश्रित को नियोजन उपलब्ध कराया जाए।
कंपनी के कर्मियों ने भी खोला मोर्चा
आंदोलन को कंपनी में कार्यरत अन्य कर्मियों का भी समर्थन मिल रहा है। कर्मियों ने एकजुट होकर प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई और श्यामल दास की मौत के लिए कंपनी प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, इन आरोपों पर कंपनी प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है।
कर्मियों ने आरोप लगाया कि कंपनी में काम करने वाले उन लोगों के साथ भी मनमाना व्यवहार किया जाता है, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बदले नियोजन मिला है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को कभी भी काम पर बुला लिया जाता है और देर से पहुंचने पर निलंबन जैसी कार्रवाई की जाती है।
कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि काम के दौरान कई बार सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
श्यामल दास की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब व्यापक रूप ले चुका है। परिजनों के साथ कंपनी के कर्मचारी और भूमि अधिग्रहण से प्रभावित कुछ स्थानीय परिवार भी आंदोलन में शामिल हैं। प्रदर्शन के कारण कंपनी का कामकाज पूरी तरह बाधित है।
परिजनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कंपनी का कामकाज शुरू नहीं होने दिया जाएगा। अब देखना होगा कि कंपनी प्रबंधन और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और आंदोलन को समाप्त कराने के लिए वार्ता की पहल कब होती है।
बाइट 2: अजय कुमार, ओवरमैन

