रांची, 18 सितंबर 2026: झारखंड में पेयजल योजनाओं के संचालन, रख-रखाव और गुणवत्ता में सुधार के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग अब प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को नॉलेज पार्टनर के रूप में जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसे लेकर शुक्रवार को नेपाल हाउस स्थित विभागीय कार्यालय में सचिव अबू इमरान की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में IIT (ISM) धनबाद, निर्मला कॉलेज रांची और रांची विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के साथ विभागीय संचालन एवं रख-रखाव नीति को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य इन संस्थानों को विभाग के साथ तकनीकी और शोध सहयोग के लिए जोड़ना रहा।
जल्द होगा MoU
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबू इमरान ने कहा कि अकादमिक संस्थानों के जुड़ने से पेयजल योजनाओं की गुणवत्ता और तकनीकी क्षमता में सुधार होगा। इससे लोगों को नियमित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही तीनों संस्थानों के साथ MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किया जाएगा।
पाइपलाइन लीकेज और जलापूर्ति योजनाओं पर तकनीकी सहयोग
बैठक में तय किया गया कि नॉलेज पार्टनर संस्थान पाइपलाइनों में लीकेज का पता लगाने, जलापूर्ति योजनाओं की डिजाइन और O&M (संचालन एवं रख-रखाव) से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के समाधान में विभाग को विशेषज्ञ सलाह देंगे।
इसके अलावा झारखंड के विभिन्न जिलों में पानी की गुणवत्ता को लेकर भी संयुक्त शोध किया जाएगा। खास तौर पर आयरन, फ्लोराइड और TDS जैसी समस्याओं को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन और समाधान की दिशा में काम किया जाएगा।
धनबाद-झरिया के जल स्रोतों पर भी होगा अध्ययन
बैठक में खनन क्षेत्रों, विशेषकर धनबाद और झरिया, में पर्यावरणीय क्षरण के कारण जल स्रोतों पर पड़ रहे प्रभाव पर भी चर्चा हुई। जल स्रोतों की दीर्घकालीन स्थिरता और संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
विभाग का उद्देश्य तकनीकी विशेषज्ञता और अकादमिक शोध को पेयजल योजनाओं से जोड़कर उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना और राज्य के लोगों को बेहतर एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।


