रांची, 18 सितंबर 2026:– बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा के प्रबंधन अध्ययन विभाग की ओर से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग से “ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और ज्ञान प्रसार” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, आजीविका के अवसरों से जोड़ने और उनके बीच ज्ञान के प्रसार को बढ़ावा देना रहा।
कार्यशाला का संयोजन BIT मेसरा के प्रबंधन अध्ययन विभाग की डॉ. सुजाता प्रियंबदा दाश ने किया, जबकि केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. राजेश्वरी चटर्जी ने आयोजन सचिव के रूप में सहयोग किया।
महिला सशक्तिकरण और आर्थिक स्वतंत्रता पर चर्चा
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। उद्घाटन सत्र में श्री अभिषेक चांद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), रांची; श्री अमरेंद्र कुमार सिंह, सचिव, DEVNET NGO, रांची और श्री नदीम अहमद, प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, ओरमांझी, रांची को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
कार्यशाला में शिक्षकों, विकास क्षेत्र के विशेषज्ञों, मास्टर ट्रेनरों और ग्रामीण महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान महिला सशक्तिकरण, आर्थिक स्वतंत्रता, बैंकिंग, आजीविका विकास, क्षमता निर्माण और उद्यमिता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
संयोजक डॉ. सुजाता प्रियंबदा दाश ने स्वागत भाषण में कृषि, सामुदायिक विकास और छोटे व्यवसायों में ग्रामीण महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षा, आर्थिक संसाधनों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी से जुड़ी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।
ग्रामीण आजीविका के अवसरों की दी गई जानकारी
BIT मेसरा के प्रबंधन अध्ययन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. कुमार संजय सावर्णी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एक महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशाला में प्रतिभागियों की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं अपने समुदाय की अन्य महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मुख्य अतिथि प्रो. संदीप सिंह सोलंकी, डीन, पोस्टग्रेजुएट स्टडीज, BIT मेसरा ने महिला सशक्तिकरण को परिवार और सामाजिक विकास से जोड़ते हुए प्रतिभागियों से कार्यशाला में मिली जानकारी को अपने परिवार और समुदाय तक पहुंचाने का आग्रह किया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में JSLPS के जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री अभिषेक चांद ने ग्रामीण आजीविका और महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर जानकारी दी। उन्होंने SHG, ग्राम संगठन (VO) और क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) के माध्यम से सामूहिक रूप से काम करने, आर्थिक सहायता प्राप्त करने और आजीविका के नए अवसर विकसित करने के बारे में बताया।
उन्होंने बकरी पालन, मुर्गी पालन, सूअर पालन, डेयरी, कृषि और अंडा उत्पादन जैसी गतिविधियों की जानकारी देते हुए उपलब्ध संसाधनों और व्यावहारिक अनुभव के आधार पर इन्हें धीरे-धीरे बढ़ाने की सलाह दी। सत्र में ऋण सुविधा, वित्तीय सहायता और छोटे व्यवसायों से जुड़ी सरकारी योजनाओं के बारे में भी चर्चा हुई। ग्रामीण महिलाओं को “लखपति दीदी” के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य पर भी विचार-विमर्श किया गया।
मास्टर ट्रेनरों को दिए गए प्रमाण-पत्र
DEVNET NGO के सचिव श्री अमरेंद्र कुमार सिंह ने क्षमता निर्माण, वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, महिला नेतृत्व और टिकाऊ आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर चर्चा की। वहीं, ओरमांझी के प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक श्री नदीम अहमद ने SHG सदस्यों को ब्लॉक कार्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए मार्गदर्शन दिया।
कार्यशाला के दौरान सभी मास्टर ट्रेनरों को भागीदारी प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. राजेश्वरी चटर्जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यशाला का आयोजन प्रबंधन अध्ययन विभाग, BIT मेसरा द्वारा किया गया, जबकि ICSSR सहयोगी संस्था के रूप में शामिल रहा। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. सुजाता प्रियंबदा दाश और आयोजन सचिव डॉ. राजेश्वरी चटर्जी रहीं।


