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जेपीएससी परीक्षा विवाद में पूर्व चेयरमैन से पूछताछ, एल. ख्यांगते ने कहा- पैसे के लालच में फंसा, डील की रकम लेने से किया इनकार

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID की पूछताछ में पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते ने कई अहम बातें सामने रखी हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने माना कि पैसे कमाने की लालच में वे इस पूरे मामले में फंस गए, हालांकि उन्होंने किसी कंपनी से सीधे रकम लेने से इनकार किया है।

ब्लैकलिस्टेड कंपनी की जानकारी से किया इनकार

CID के सवालों के जवाब में एल. ख्यांगते ने कहा कि परीक्षा संचालन का जिम्मा जिस TDPL कंपनी को दिया गया था, उसके पहले से ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी उन्हें नहीं थी। उन्होंने परीक्षार्थियों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने, OMR शीट में छेड़छाड़ करने या परीक्षा परिणाम में किसी तरह की हेराफेरी के आरोपों को भी खारिज किया।

दोस्तों ने चेयरमैन बनने से किया था मना

पूछताछ में यह भी सामने आया कि मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद ख्यांगते के कुछ दोस्तों ने उन्हें JPSC का चेयरमैन बनने से बचने की सलाह दी थी। दोस्तों का मानना था कि आयोग की जिम्मेदारी संभालने पर वे विवादों में घिर सकते हैं। इसके बावजूद ख्यांगते ने खुद JPSC चेयरमैन बनने की इच्छा जताई और पद स्वीकार किया।

दो करोड़ की कथित डील से जुड़ा मामला

CID की जांच में TDPL के निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों के बयानों से कथित वित्तीय डील का मामला सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, TDPL निदेशक रामबीर सिंह ने पूछताछ में बताया था कि परीक्षा का काम हासिल करने के लिए चेयरमैन के साथ कथित तौर पर दो करोड़ रुपये की डील हुई थी।

जांच में यह भी आरोप सामने आया कि प्रत्येक परीक्षा के बदले 20 प्रतिशत कमीशन और मुख्य सचिव के आवास पर कार्यरत धर्मेंद्र के लिए 20 से 25 लाख रुपये के भुगतान की बात तय हुई थी। अभय तिवारी ने भी कथित तौर पर CID को बताया कि दो करोड़ रुपये की डील धर्मेंद्र के माध्यम से तय हुई थी।

मनी ट्रेल खंगाल रही CID

मामले की जांच के दौरान CID ने TDPL निदेशक रामबीर सिंह, सत्यपाल, अभय तिवारी, JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और धर्मेंद्र से वित्तीय लेन-देन को लेकर पूछताछ की है।

अब जांच एजेंसी कथित लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने के लिए मनी ट्रेल की पड़ताल कर रही है। बैंक खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच के लिए संबंधित बैंकों से भी जानकारी मांगी गई है। CID का फोकस यह पता लगाने पर है कि कथित डील की रकम वास्तव में किसके पास पहुंची और पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

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