रांची : झारखंड आंदोलनकारी, महान शिक्षाविद एवं पूर्व सांसद पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा की जयंती पर आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने मोरहाबादी स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुदेश महतो ने कहा कि डॉ. रामदयाल मुंडा केवल एक महान शिक्षाविद और चिंतक नहीं थे, बल्कि झारखंड की अस्मिता, भाषा, संस्कृति और अधिकारों की लड़ाई के महत्वपूर्ण वैचारिक मार्गदर्शक थे। आजसू के आंदोलन को बौद्धिक दिशा देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुंडा ने भाषा, संस्कृति और शिक्षा को झारखंड के विकास की बुनियाद माना। क्षेत्रीय भाषाओं को सम्मान दिलाने और उन्हें शिक्षा से जोड़ने की दिशा में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा। उनकी जयंती केवल उन्हें याद करने का दिन नहीं, बल्कि उनके सपनों के झारखंड के निर्माण का संकल्प लेने का अवसर है।
छात्र आंदोलनों पर सुदेश महतो ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरने वाला छात्र दुश्मन नहीं, बल्कि राज्य का भविष्य है। रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और बेहतर भविष्य की मांग कर रहे युवाओं के साथ दमन के बजाय संवाद होना चाहिए। सरकार को आंदोलन के कारणों को समझकर युवाओं से बातचीत करनी चाहिए।
खनिज संपदा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य के लोगों के हितों की सुरक्षा जरूरी है। खनिज से मिलने वाले राजस्व का लाभ खनन प्रभावित क्षेत्रों, विस्थापित परिवारों और आदिवासी-मूलवासी समुदायों तक प्राथमिकता के साथ पहुंचना चाहिए।
सुदेश महतो ने कहा कि डॉ. रामदयाल मुंडा का सपना ऐसा झारखंड था, जहां विकास के साथ पहचान और संस्कृति सुरक्षित रहे तथा प्राकृतिक संसाधनों पर लोगों के अधिकार कायम रहें। उनके विचार आज भी राज्य के लिए मार्गदर्शक हैं।
इस अवसर पर आजसू पार्टी के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे तथा डॉ. रामदयाल मुंडा की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।


