रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर चल रही जांच में रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। CID की पूछताछ में गिरफ्तार तीन सफल अभ्यर्थियों के बारे में दावा किया गया है कि वे खुद परीक्षा में शामिल होने के साथ-साथ कथित तौर पर एजेंट की भूमिका भी निभा रहे थे। जांच में इनके संपर्क अभय तिवारी से जुड़े कथित सिंडिकेट के लोगों से होने की बात सामने आने की जानकारी है। हालांकि, इन बयानों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच एजेंसी की ओर से नहीं की गई है।
सफल अभ्यर्थी ही बने एजेंट?
रिपोर्ट के अनुसार, उमाकांत उरांव, मनोज कुमार और रोशन केरकेट्टा को CID ने गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। पूछताछ में कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि ये लोग खुद अभ्यर्थी होने के साथ अन्य अभ्यर्थियों को भी अनुचित तरीके से परीक्षा में सफल कराने के लिए एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। इनके संपर्क अभय तिवारी से जुड़े नेटवर्क से होने का दावा किया गया है।
2204 सफल अभ्यर्थियों की OMR जांच
14वीं JPSC PT में कुल 2204 अभ्यर्थी सफल हुए थे। CID को अब तक 1750 अभ्यर्थियों की OMR शीट मिलने की जानकारी है। जांच एजेंसी सफल अभ्यर्थियों की मूल और कार्बन OMR शीट का मिलान कर रही है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या हेरफेर की पुष्टि की जा सके।
अभय तिवारी के नेटवर्क की भी जांच
14वीं JPSC PT विवाद में अभय तिवारी का नाम कथित परीक्षा सिंडिकेट से जोड़कर सामने आया है। जांच एजेंसियां परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनियों और उनके नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों में TDPL, Binsys और ICN जैसी कंपनियों के नाम भी जांच के संदर्भ में सामने आए हैं।
फिलहाल CID की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सफल अभ्यर्थियों और कथित सिंडिकेट के बीच वास्तव में किस स्तर का संबंध था और परीक्षा में कितनी गड़बड़ी हुई।
नोट: इस मामले में सामने आए कई आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।


