11 साल बाद झारखंड पुलिस के 800 से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश
रांची:- झारखंड पुलिस आरक्षी नियुक्ति विज्ञापन संख्या 4/2015 के तहत लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे 800 से अधिक अभ्यर्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने मूल रिट याचिकाकर्ताओं को शारीरिक दक्षता परीक्षा में डीम्ड क्वालिफाइड मानते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
यह मामला जितेंद्र कुमार शर्मा एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य से संबंधित है। वर्ष 2015 की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल इन अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के साथ शारीरिक दक्षता परीक्षा की प्रक्रिया पूरी की थी। नियुक्ति नहीं होने के बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कराया गया फिजिकल टेस्ट
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहले अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा में छूट देते हुए नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया था। अदालत ने दोबारा मेडिकल जांच और शारीरिक दक्षता परीक्षा कराने को भी कहा था।
इसके बाद झारखंड पुलिस ने रांची एसएसपी के नेतृत्व में एक बोर्ड का गठन कर शारीरिक दक्षता परीक्षा करायी। 20 अगस्त को 437 अभ्यर्थियों और 21 अगस्त को करीब 125 अभ्यर्थियों ने दौड़ में हिस्सा लिया।
अभ्यर्थियों के लिए 1600 मीटर की दौड़ तीन मिनट में पूरी करने की शर्त रखी गयी थी। पुलिस की ओर से करायी गयी परीक्षा में केवल दो अभ्यर्थी ही निर्धारित समय में दौड़ पूरी कर सके। इसके बाद बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंप दी।
कोर्ट ने मूल याचिकाकर्ताओं को माना डीम्ड क्वालिफाइड
21 अगस्त को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मामले की स्थिति की जानकारी ली। पुलिस की ओर से आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा के परिणाम से अदालत को अवगत कराया गया।
इसके बाद अदालत ने मूल रिट याचिकाकर्ताओं को फिजिकल टेस्ट में डीम्ड क्वालिफाइड मानने का आदेश दिया। साथ ही राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि सफल अभ्यर्थियों में करीब 300 होमगार्ड भी हैं। ये कर्मचारी पिछले लगभग 15 वर्षों से राज्य में सेवा दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन होमगार्ड कर्मियों को भी समायोजित करने का निर्देश दिया।
सिर्फ मूल याचिकाकर्ताओं को मिलेगा लाभ
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि राहत का लाभ केवल मूल रिट याचिकाकर्ताओं को मिलेगा। इस आदेश को भविष्य के मामलों में मिसाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। वहीं, बाद में हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों को इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, शारीरिक दक्षता परीक्षा में अधिकांश अभ्यर्थियों के निर्धारित समय में दौड़ पूरी नहीं कर पाने के बावजूद नियुक्ति का रास्ता इसलिए खुला है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने विशेष परिस्थितियों और मानवीय आधार को देखते हुए मूल याचिकाकर्ताओं को डीम्ड क्वालिफाइड मानकर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।
11 साल बाद नौकरी की उम्मीद जगी
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद वर्ष 2015 की झारखंड पुलिस आरक्षी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े 800 से अधिक अभ्यर्थियों के लिए करीब 11 साल पुराना इंतजार खत्म होने की उम्मीद जगी है। अब राज्य सरकार को अदालत के निर्देश के अनुसार चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इस मामले में सुनवाई कर रही पीठ ने पिछले कुछ महीनों के दौरान कई अहम निर्देश जारी किए थे। अंतिम आदेश के बाद मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संजय करोल 22 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए।


