झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा एक्शन, JSSC CGL समेत 22 परीक्षाएं रद्द; 23 मामलों की CID जांच
रांची: झारखंड सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और TDPL की संलिप्तता से जुड़े मामलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने JSSC CGL (10/2023) समेत कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। इनमें JPSC की 21 परीक्षाएं शामिल हैं। वहीं, 23 अन्य परीक्षाओं की जांच CID को सौंपने का निर्णय लिया गया है।
रद्द की गई परीक्षाओं में JPSC की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल है। इस परीक्षा के माध्यम से चयनित 342 अधिकारी वर्तमान में सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। इसके अलावा CDPO और Food Safety Officer के पदों पर कार्यरत अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर भी फैसले का असर पड़ सकता है। JSSC CGL के जरिए नियुक्त करीब 1975 कर्मियों की नौकरी भी इस निर्णय से प्रभावित होने की स्थिति में है।
23 परीक्षाओं की जांच अब CID करेगी
सरकार ने 23 परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों और शिकायतों की जांच CID से कराने का आदेश दिया है। यह निर्णय कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद लिया गया। 18 अगस्त की देर रात कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से संबंधित अधिसूचना जारी की गई।
सरकार के मुताबिक, CID/SIT की जांच में सामने आए तथ्यों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। इसके साथ ही JPSC और JSSC में परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की निगरानी और व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ बनाने का निर्णय भी लिया गया है।
हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का आग्रह
परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और कदाचार के मामलों की जल्द सुनवाई के लिए राज्य सरकार झारखंड हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का आग्रह करेगी। सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा करना और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
इसके अलावा भविष्य में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए परीक्षा व्यवस्था में सुधार संबंधी कमेटी गठित करने का भी फैसला लिया गया है।
JPSC की 22 परीक्षाओं पर पड़ा असर
सरकार के फैसले के तहत JPSC की निम्न परीक्षाएं रद्द की गई हैं:
- विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक अधिकारियों के पदों की परीक्षा (09/2025)
- सहायक निदेशक/वरीय वैज्ञानिक पदाधिकारी बैकलॉग (10/2025)
- सहायक निदेशक/वरीय वैज्ञानिक पदाधिकारी रेगुलर (11/2025)
- ड्रग इंस्पेक्टर (12/2025)
- राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर बैकलॉग (02/2026)
- राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज व्याख्याता बैकलॉग (03/2026)
- राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज व्याख्याता रेगुलर (04/2026)
- मेडिकल कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर सुपर स्पेशलिस्ट (07/2026)
- सिविल जज जूनियर डिविजन (22/2023)
- सहायक वन संरक्षक (03/2024)
- फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (04/2024)
- एपीपी बैकलॉग (05/2025)
- एपीपी रेगुलर (06/2025)
- सिविल सेवा परीक्षा-2025 रेगुलर (01/2026)
- सिविल सेवा परीक्षा बैकलॉग-2025 (05/2026)
- सिविल सेवा बैकलॉग-2023 (06/2026)
- फूड सेफ्टी ऑफिसर (18/2023)
- सीडीपीओ (21/2023)
- सिविल सेवा परीक्षा-2023 (01/2024)
- छठी लिमिटेड उपसमाहर्ता परीक्षा (11/2018)
- झारखंड पात्रता परीक्षा-2024 (08/2015)
इन 23 परीक्षाओं की होगी CID जांच
सरकार ने जिन परीक्षाओं की जांच CID को सौंपी है, उनमें फूड एनालिस्ट, उपनिदेशक प्रोसिक्यूशन, प्रोजेक्ट मैनेजर, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, बॉयलर इंस्पेक्टर, निदेशक समेत कई महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल हैं।
इसके अलावा पांचवीं सिविल सेवा परीक्षा, सिविल जज जूनियर डिविजन, सहायक निदेशक कृषि, फूड सेफ्टी ऑफिसर, डेंटिस्ट, सिविल सेवा परीक्षा बैकलॉग, कमर्शियल टैक्स लिमिटेड परीक्षा, जियोलॉजिस्ट-केमिस्ट, एपीपी, संयुक्त असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल सर्विस परीक्षा-2021 और डेंटल डॉक्टर जैसी परीक्षाएं भी CID जांच के दायरे में हैं।
नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों पर भी संकट
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है, जिनका चयन रद्द की गई परीक्षाओं के जरिए हुआ था। 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा के चयनित 342 अधिकारी, JSSC CGL से नियुक्त 1975 कर्मी तथा CDPO और Food Safety Officer के पदों पर कार्यरत अभ्यर्थियों का भविष्य अब सरकार की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
सरकार के इस फैसले से जहां परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की उम्मीद जगी है, वहीं चयनित अभ्यर्थियों के बीच नौकरी की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।


