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झारखंड JE पेपर लीक का खुला बड़ा राज, पूर्व निदेशक अरुण कुमार पर 15-15 लाख में पेपर बेचने का आरोप

रांची। झारखंड में जूनियर इंजीनियर (JE) नियुक्ति परीक्षा पेपर लीक मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। मुंबई से गिरफ्तार परीक्षा संचालन एजेंसी बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व निदेशक अरुण कुमार को पुलिस ने कथित पेपर लीक का मुख्य सूत्रधार बताया है। पुलिस की जांच में आरोप है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र और उसके उत्तर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए थे। इसके लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से कथित तौर पर 15-15 लाख रुपये या उससे अधिक की रकम वसूली गई थी।

ताजा जानकारी के अनुसार, रांची पुलिस ने नामकुम थाना में वर्ष 2022 में दर्ज मामले की केस डायरी और विशेष अदालत में दाखिल जांच से जुड़े तथ्यों में अरुण कुमार की भूमिका का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, अरुण कुमार तकनीकी रूप से दक्ष था और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय प्रक्रिया की जानकारी का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर रहा था।

मुंबई से हुई थी पूर्व निदेशक की गिरफ्तारी

इस मामले में रांची पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने 10 अगस्त 2026 को अरुण कुमार को मुंबई से गिरफ्तार किया था। वह मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस जांच के अनुसार, अरुण कुमार दिल्ली स्थित बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा था। यह एजेंसी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की जूनियर इंजीनियर नियुक्ति परीक्षा के संचालन का काम देख रही थी।

3 जुलाई 2022 को हुई थी परीक्षा, पहले ही वायरल हो गए थे उत्तर

दरअसल, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने 3 जुलाई 2022 को 1,279 जूनियर इंजीनियर पदों पर नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा की पहली पाली शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र और उत्तरमाला के लीक होने की खबर सामने आ गई थी।

प्रश्नपत्र और उसके उत्तर सोशल मीडिया तथा व्हाट्सएप के माध्यम से प्रसारित होने के आरोप लगे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने परीक्षा रद्द कर दी थी। इससे हजारों अभ्यर्थियों को निराशा का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद अभ्यर्थी मिथिलेश कुमार महतो की लिखित शिकायत पर 14 जुलाई 2022 को रांची के नामकुम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम का गठन किया गया।

15-15 लाख रुपये में सीट दिलाने का आरोप

पुलिस की जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, पेपर लीक के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इस नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराए जाते थे।

पुलिस के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को पटना में गोपनीय स्थानों पर बुलाया गया था, जहां उन्हें प्रश्नों के उत्तर याद करवाए गए थे। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कथित तौर पर 15 लाख रुपये या उससे अधिक लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की बात सामने आई है।

परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया तक थी पहुंच

जांच में यह भी सामने आया है कि बिंसिस टेक्नोलॉजी को परीक्षा से संबंधित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। इनमें प्रश्नपत्रों की छपाई, परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की बायोमीट्रिक और फोटोग्राफिक कैप्चरिंग, ओएमआर शीट की स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग और परिणाम तैयार करने जैसे काम शामिल थे।

पुलिस का आरोप है कि अरुण कुमार को इन प्रक्रियाओं की जानकारी थी। इसी का कथित रूप से फायदा उठाकर परीक्षा से पहले गोपनीय प्रश्नपत्र और उत्तर बाहर पहुंचाए गए।

पुलिस के अनुसार, अरुण कुमार ने वर्ष 2019 में कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसके बावजूद वह एजेंसी के कामकाज और महत्वपूर्ण बैठकों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

अब तक कई आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी

इस मामले में SIT पहले भी कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें रंजीत मंडल, दीपक कुमार, अभिषेक कुमार, दीपक श्रीवास्तव और परीक्षा संचालन एजेंसी का सीनियर मैनेजर कृष्ण कुमार शामिल हैं।

अब पूर्व निदेशक अरुण कुमार की गिरफ्तारी और उसकी कथित भूमिका सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि पेपर लीक का नेटवर्क किस तरह काम करता था, गोपनीय प्रश्नपत्र किन लोगों तक पहुंचा और इस पूरे खेल में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।

JPSC परीक्षा में भी सामने आई थी कथित भूमिका

अरुण कुमार का नाम झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कुछ परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में भी सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, CID ने उसे JPSC से संबंधित एक अन्य मामले में भी आरोपित बनाया था और अगस्त 2026 में उससे पूछताछ की थी।

इस पूरे प्रकरण ने झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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