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कतरी नदी पर बना अवैध पुल ध्वस्त, विजय कुमार झा ने प्रशासन को दिया धन्यवाद

बाघमारा: धनबाद जिले के बाघमारा क्षेत्र में कतरी नदी पर बनाए गए कथित अवैध पुल को ध्वस्त किए जाने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की सराहना की जा रही है। वियाडा के पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार झा ने धनबाद के उपायुक्त और बाघमारा के अंचलाधिकारी गिरजानंद किस्कू के प्रति आभार जताया है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उपायुक्त के आदेश पर ध्वस्त किया गया पुल

मिली जानकारी के अनुसार, धनबाद उपायुक्त के आदेश पर बीसीसीएल एरिया-4 के चेतूडीह कोलियरी क्षेत्र में कतरी नदी पर बने पुल को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई। इस मामले में बाघमारा के अंचलाधिकारी गिरजानंद किस्कू की शिकायत पर कतरास थाना कांड संख्या 269/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

विजय कुमार झा ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रशासन की कार्रवाई के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि नदी पर बने कथित अवैध पुल को हटाना जरूरी था, लेकिन इसके साथ ही मामले की पूरी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए।

आरके माइंस आउटसोर्सिंग कंपनी पर आरोप

यह मामला बीसीसीएल एरिया-4 के चेतूडीह कोलियरी में संचालित आरके माइंस आउटसोर्सिंग कंपनी से जुड़ा है। आरोप है कि कतरी नदी पर पुल बनाकर भारी वाहनों की आवाजाही कराई जा रही थी। इसके साथ ही ओवरबर्डन (ओबी) और कोयला उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित की जा रही थीं।

इस गतिविधि से नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पानी की स्वच्छता प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, इन आरोपों और पर्यावरणीय प्रभावों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के आधार पर ही हो सकेगी।

वार्ड पार्षद ने भी उठाया था मामला

इससे पहले धनबाद नगर निगम के वार्ड संख्या-5 की पार्षद निरुपमा देवी ने भी कतरी नदी पर बने पुल का मामला उठाया था। उन्होंने शिकायत करने के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया और पुल हटाने की पहल की थी।

आरोप है कि पहले आपत्ति उठाए जाने के बावजूद दोबारा पुल का निर्माण कर दिया गया था। ऐसे में अब पुल ध्वस्त किए जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

प्राथमिकी के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की मांग

विजय कुमार झा ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई केवल पुल ध्वस्त करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और निर्माण तथा उससे जुड़ी गतिविधियों में शामिल लोगों की भूमिका तय की जानी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब मामले में पुलिस और संबंधित विभागों की जांच तथा आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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