आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत को लेकर झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मौत से पहले सोशल मीडिया पर जारी उनके लाइव वीडियो ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। वीडियो में निशा भगत ने जमीन विवाद को लेकर अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब इसी वीडियो को आधार बनाकर बीजेपी ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है। पार्टी का सवाल है कि जब निशा भगत लाइव आकर अपनी जान देने की बात कह रही थीं, तब पुलिस ने उन्हें बचाने के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए?
बाबूलाल बोले- वीडियो में जिनके नाम, उन पर दर्ज हो FIR
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने मांग की है कि निशा भगत के अंतिम लाइव वीडियो में जिन लोगों का नाम सामने आया है, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। बाबूलाल ने मुख्यमंत्री पर भी आरोपों को लेकर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।
संजय सेठ ने भी उठाई न्याय की मांग
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी निशा भगत की मौत को गंभीर मामला बताते हुए न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, रांची की मेयर रोशनी खलखो ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
आदित्य साहू ने पुलिस प्रशासन को घेरा
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि निशा भगत जमीन से जुड़े मामलों को लेकर लगातार आवाज उठा रही थीं। उन्होंने सवाल किया कि जब निशा भगत लाइव वीडियो में अपनी जिंदगी खत्म करने की बात कह रही थीं, तब पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? अगर पुलिस को इसकी जानकारी थी, तो उनकी सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
आदित्य साहू ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर निशा भगत को जल्द न्याय नहीं मिला तो झारखंड जल उठेगा। उनके इस बयान ने मामले को लेकर राजनीतिक माहौल और गरमा दिया है।
15 हजार से अधिक लोगों ने देखा था लाइव वीडियो
बताया जा रहा है कि निशा भगत के लाइव वीडियो को 15 हजार से अधिक लोगों ने देखा था। इस वीडियो में उन्होंने जमीन विवाद और अपने संघर्ष से जुड़े कई आरोप लगाए थे। अब बीजेपी इन आरोपों की जांच और पुलिस की भूमिका की पड़ताल की मांग कर रही है।
फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। लाइव वीडियो में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या है? क्या पुलिस को पहले से किसी अनहोनी की आशंका थी? क्या समय रहते हस्तक्षेप किया जाता तो स्थिति अलग हो सकती थी? इन सभी पहलुओं पर निष्पक्ष जांच जरूरी है। अब सबकी नजर पुलिस की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

