हजारीबाग:-MMDR (Mines and Minerals (Development and Regulation)) अधिनियम को लेकर झारखंड में सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झामुमो और कांग्रेस पर कानून को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। सोमवार को हजारीबाग में प्रेसवार्ता के दौरान साहू ने राज्य सरकार की खनिज नीति और सेस वसूली को लेकर भी कई सवाल उठाए।
आदित्य साहू ने कहा कि झामुमो और कांग्रेस MMDR अधिनियम की गलत व्याख्या कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि देश के अन्य राज्यों में इस कानून को लेकर ऐसा विरोध नहीं है और झारखंड में विपक्षी दल राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब MMDR कानून को लेकर झारखंड में भाजपा के साथ-साथ झामुमो और कांग्रेस भी अलग-अलग कार्यक्रम कर रहे हैं।
साहू ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार को राज्य के राजस्व की चिंता नहीं है, बल्कि अपनी “तिजोरी भरने” की चिंता है। उन्होंने सरकार की नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में “कमाओ, खाओ और दलालों के बीच बांटो” जैसी स्थिति बनी हुई है। ये आरोप भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के राजनीतिक दावे हैं।
उन्होंने झारखंड में कोयले पर 450 रुपये प्रति टन और आयरन ओर पर 600 रुपये प्रति टन सेस लगाए जाने का मुद्दा उठाया। साहू के मुताबिक, पड़ोसी राज्यों की तुलना में झारखंड में सेस अधिक होने के कारण स्थानीय उद्योगों के लिए यहां से खनिज खरीदना महंगा पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कारोबारी दूसरे राज्यों से कोयला खरीदने की ओर जा रहे हैं, जिससे झारखंड के राजस्व पर असर पड़ सकता है।
आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता 19 से 30 सितंबर तक प्रदेशभर में जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को MMDR अधिनियम के प्रावधानों और उसके प्रभावों की जानकारी देंगे। इस दौरान प्रेसवार्ता, नुक्कड़ सभाएं, गोष्ठियां और कानून की प्रतियां वितरित करने जैसे कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
वहीं, MMDR कानून को लेकर झामुमो और कांग्रेस की ओर से भी विरोध दर्ज कराया जा रहा है। झामुमो ने 19 सितंबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन किया था, जबकि कांग्रेस भी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रही है।
झारखंड में खनन राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक राज्य ने खनन राजस्व लक्ष्य का 30.66 प्रतिशत यानी 8,277.48 करोड़ रुपये हासिल किए थे। ऐसे में MMDR से जुड़े प्रावधानों और खनिज राजस्व को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।


