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रांची अब तक नहीं बन पाई स्लम फ्री सिटी, 447 स्लम चिन्हित होने के बाद भी हजारों परिवार आवास के इंतजार में

रांची:– झारखंड की राजधानी रांची को स्लम फ्री सिटी बनाने की योजनाएं वर्षों से चल रही हैं, लेकिन नगर विकास एवं आवास विभाग की उदासीनता के कारण अब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। वर्ष 2017 में नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से राजधानी रांची में कुल 447 स्लम बस्तियों को चिह्नित किया गया था। इन बस्तियों में रहने वाले लोगों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत आवास निर्माण की योजना बनाई गई थी, लेकिन कई योजनाएं जमीन विवाद, लाभुकों के अंशदान और प्रशासनिक स्तर पर निर्णय नहीं होने के कारण अधर में हैं।

2017 में 447 स्लम किए गए थे चिह्नित

विभागीय स्तर पर किए गए सर्वे के अनुसार रांची में चिह्नित 447 स्लम में से 41 स्लम एचईसी क्षेत्र, पांच स्लम नगर निगम क्षेत्र, सरकारी भूमि पर 43 स्लम, आंशिक रूप से सरकारी भूमि पर 19 स्लम और निजी भूमि पर 347 स्लम स्थित थे।

इन बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए कुल 13,102 आवासों का निर्माण कराने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए करीब 180 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई थी।

स्लम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को पक्के और बेहतर आवास उपलब्ध कराने के लिए पहले बीएसयूपी (BSUP), राजीव आवास योजना (RAY) और बाद में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी योजनाओं का सहारा लिया गया।

मधुकम में बने आवास, लेकिन सभी लाभुकों को नहीं मिला लाभ

बीएसयूपी के तहत मधुकम में 336 जी+3 आवासों का निर्माण कराया गया था। इनमें खादगढ़ा बस स्टैंड के 136 लाभुकों को आवास आवंटित किया गया।

राज्य सरकार के निर्देश के बाद बाल्मीकि नगर के 162 लाभुकों को भी इन आवासों में बसाने की स्वीकृति दी गई थी। इसके अलावा वार्ड-19 स्थित बिरसा मुंडा कारागार पार्क के एक छोर पर बसे 144 लोगों को भी संबंधित आवासों में बसाने की योजना थी।

हालांकि, बाद में इन 144 लोगों को पार्क परिसर के पिछले हिस्से में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास बनाकर बसाया गया।

वहीं बाल्मीकि नगर के 162 लाभुकों में से केवल 60 लोगों ने रांची नगर निगम में अंशदान जमा किया। बाकी लाभुकों द्वारा अंशदान की राशि जमा नहीं किए जाने के कारण आवास आवंटन की प्रक्रिया रद्द कर दी गई।

इसके बाद सरकार ने घोषणा की थी कि बाल्मीकि नगर के सभी 162 लोगों को उसी क्षेत्र में आवास बनाकर बसाया जाएगा, लेकिन अब तक इन लोगों को आवासीय सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है।

RAY के तहत 1565 आवासों की थी योजना

राजीव आवास योजना (RAY) के तहत रांची की पांच स्लम बस्तियों में कुल 1,565 आवास बनाने की योजना थी।

इनमें—

  • बड़ा घाघरा में 984 आवास
  • उरांव टोली बरियातू में 174 आवास
  • महुआ टोली में 217 आवास
  • नामकुम बस्ती में 108 आवास
  • लोहरा कोचा में 82 आवास

का निर्माण प्रस्तावित था।

इन आवासों में प्रत्येक इकाई करीब 300 वर्गफीट की थी। इसमें दो कमरे, एक रसोई, एक स्नानागार और एक शौचालय के साथ सेप्टिक टैंक की व्यवस्था की जानी थी। प्रत्येक आवास की अनुमानित लागत करीब 3.88 लाख रुपये थी।

हालांकि जमीन विवाद के कारण 271 आवास सरेंडर करने पड़े। इससे स्लम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को पक्के मकान देने की योजना को बड़ा झटका लगा।

आनी में 4,400 PMAY आवासों का निर्माण अटका

वर्तमान में एचईसी क्षेत्र के आनी में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत 4,400 आवासों के निर्माण की योजना है। इसके लिए एचईसी क्षेत्र की 16 बस्तियों को चिह्नित किया गया है।

लेकिन यहां भी योजना लाभुकों के अंशदान को लेकर अटक गई है। योजना के तहत प्रत्येक लाभुक को करीब नौ लाख रुपये का अंशदान देना है। लाभुक इतनी बड़ी राशि जमा करने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी वजह से आवास निर्माण का काम फिलहाल बंद है।

नगरीय प्रशासन निदेशालय की ओर से नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से निर्माणाधीन 4,400 आवासों को हाउसिंग फॉर ऑल के तहत स्वीकृति देने का अनुरोध किया गया था। हालांकि इस दिशा में अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।

योजनाएं बनीं, लेकिन स्लम फ्री रांची का सपना अधूरा

रांची में स्लम बस्तियों के पुनर्वास और वहां रहने वाले लोगों को पक्का आवास देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं। कुछ जगहों पर आवास बने भी, लेकिन बड़ी संख्या में लाभुक अभी भी आवास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

जमीन विवाद, लाभुकों का अंशदान, आवास आवंटन की प्रक्रिया और विभागीय निर्णय में देरी जैसी समस्याओं के कारण योजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई है। ऐसे में सवाल यह है कि वर्षों से चल रही योजनाओं के बावजूद राजधानी रांची को आखिर कब तक स्लम फ्री सिटी बनाने का लक्ष्य पूरा होगा।

राजधानी में बड़ी संख्या में परिवार आज भी स्लम बस्तियों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में जरूरत है कि सरकार और नगर विकास विभाग लंबित आवास परियोजनाओं की समीक्षा कर जमीन, अंशदान और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले, ताकि स्लम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को जल्द पक्के और सुरक्षित आवास मिल सकें।

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