लातेहार: झारखंड के लातेहार जिले का पारंपरिक और सुगंधित जीराफूल चावल अब प्रीमियम बाजार तक पहुंच बनाने लगा है। महुआडांड़ क्षेत्र में उत्पादित इस चावल को बड़े बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण व्यावसायिक सफलता मिली है।
KISSAN SAY Agtech Pvt. Ltd. ने नेतरहाट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को 25 मीट्रिक टन जीराफूल चावल का पहला खरीद आदेश दिया है। इस ऑर्डर की कुल कीमत ₹26.25 लाख (IGST सहित) है। खरीद आदेश 24 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था, जिसमें 1 और 2 किलोग्राम के कुल 16,250 पैकेट शामिल हैं।
इसी क्रम में 31 अगस्त 2026 को करीब 6.70 मीट्रिक टन जीराफूल चावल लातेहार से गुरुग्राम स्थित KISSAN SAY के वेयरहाउस भेजा गया। यह स्थानीय उत्पाद को बड़े और प्रीमियम बाजार से जोड़ने की दिशा में अहम उपलब्धि मानी जा रही है।
जीराफूल चावल अपनी विशिष्ट खुशबू, महीन दाने, मुलायम बनावट और अलग स्वाद के लिए जाना जाता है। उपलब्ध परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इसमें प्रति 100 ग्राम 8.96 ग्राम प्रोटीन और 57 का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) दर्ज किया गया है। इसके अलावा इसमें कुल वसा, संतृप्त वसा और सोडियम की मात्रा भी कम पाई गई है।
महुआडांड़ में जिला प्रशासन द्वारा स्थापित राइस-कम-पीनट प्रोसेसिंग यूनिट इस पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत आधार दे रही है। इसका संचालन नेतरहाट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड कर रही है, जिससे करीब 1,500 किसान जुड़े हुए हैं। JSLPS के सहयोग और मार्गदर्शन से किसानों के उत्पाद को प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने में मदद मिली है।
JSLPS के सेतु सेल ने किसानों, एफपीओ, प्रसंस्करण, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाजार के बीच जरूरी कड़ियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस पहल से जीराफूल चावल को केवल स्थानीय कृषि उपज के बजाय मूल्यवर्धित और बाजार-उन्मुख उत्पाद के रूप में स्थापित करने का रास्ता तैयार हुआ है।
यह पहल झारखंड के अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है, जहां बेहतर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क के जरिए किसानों की उपज को अधिक मूल्य दिलाने और टिकाऊ आजीविका के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम किया जा सकता है।

